
पलामू : शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि तीन हजार बच्चों का भविष्य संभालने के लिए मात्र एक शिक्षक मौजूद हो। ऐसा ही हैरान करने वाला मामला पलामू जिले से सामने आया है। यदि चार दिनों में व्यवस्था ठीक नहीं हुई तो यहां के दो बड़े डिग्री कॉलेजों में इस बार छात्र ग्रेजुएशन सत्र 2026-30 में एडमिशन नहीं ले सकेंगे। नीलांबर-पीतांबर यूनिवर्सिटी NPU ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों कॉलेजों के साइंस फैकल्टी की मान्यता पर फिलहाल रोक लगा दी है।
मार्च में हुआ था औचक निरीक्षण, खुली पोल
पूरा मामला हुसैनाबाद स्थित ‘एके सिंह डिग्री कॉलेज’ और तरहसी के ‘एसएसएमएस डिग्री कॉलेज’ से जुड़ा है। विश्वविद्यालय की एक विशेष टीम ने इसी साल मार्च में दोनों कॉलेजों का दौरा कर जमीनी व्यवस्था का जायजा लिया था। जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, वह बेहद निराशाजनक थी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कॉलेजों में औसतन 3,000 विद्यार्थियों के अनुपात में महज एक ही शिक्षक पदस्थ हैं। इसे देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सख्त फैसला लिया। मानव संसाधन विकास विभाग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया है कि जब तक कमियां दूर नहीं होंगी, तब तक नए सत्र में छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
30 जुलाई तक सुधरने का मौका
यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि आगामी 7 अगस्त से ग्रेजुएशन के नए बैच 2026-30 की कक्षाएं और सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में कॉलेजों को अपनी व्यवस्था सुधारने के लिए 30 जुलाई तक की अंतिम मोहलत दी गई है। अगर तय समय सीमा के भीतर शिक्षक और बुनियादी ढांचा दुरुस्त नहीं किया गया तो विज्ञान संकाय का पूरा सत्र प्रभावित हो सकता है।
विश्वविद्यालय में चल रही व्यापक पड़ताल
शनिवार को प्रेस वार्ता के दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय की अन्य गतिविधियों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि सितंबर में दीक्षांत समारोह आयोजित करने की तैयारी चल रही है, जिसके लिए राजभवन से हरी झंडी मिल चुकी है।
सभी प्राइवेट कॉलेजों का कराया जा रहा ऑडिट
इसके साथ ही, कॉलेजों में शिक्षकों की फर्जी हाजिरी या कागजी खानापूर्ति रोकने के लिए सभी प्राइवेट कॉलेजों का ऑडिट कराया जा रहा है। कुलपति के मुताबिक, अब तक सिर्फ महुआडांड़ स्थित ‘संत जेवियर कॉलेज’ ने ही अपने शिक्षकों का पूरा और सही डेटा जमा किया है। वहीं, यूनिवर्सिटी में सालों से चल रहे दोहरे भुगतान से जुड़े एक पुराने विवाद पर उन्होंने स्पष्ट किया कि 2009 से अब तक की पूरी प्रणाली की वित्तीय जांच की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को समाप्त किया जा सके।
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