
देवघर : राजकीय श्रावणी मेला पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है। सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी है। जिला प्रशासन के अनुसार सोमवार की शाम तक दो लाख से अधिक शिवभक्तों के देवघर पहुंचने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सुगम जलार्पण के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कराया जा सके।
सावन की पहली सोमवारी पर बाबाधाम में भारी भीड़
श्रावणी मेला शुरू होने के साथ ही बाबा नगरी शिवभक्ति के रंग में रंग चुकी है। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा देवघर गूंज रहा है। पहली सोमवारी को देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में कांवरियों और श्रद्धालुओं के पहुंचे। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा, श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। प्रशासन का अनुमान है कि दोपहर तक श्रद्धालुओं की संख्या दो लाख के आंकड़े को पार कर सकती है।
अजगैवीनाथ से जल उठाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मेला शुरू होने के पहले दिन लगभग 47 हजार, दूसरे दिन करीब एक लाख तथा तीसरे दिन शाम तक 70 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगाजल लेकर देवघर की यात्रा शुरू की। इन आंकड़ों के आधार पर माना जा रहा है कि पहली सोमवारी पर भक्तों का दबाव सबसे अधिक रहेगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संयुक्त योजना लागू
इस वर्ष पहली बार झारखंड और बिहार प्रशासन ने अजगैवीनाथ से बाबा बैद्यनाथ धाम तक समन्वित व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की संख्या पर लगातार निगरानी रखना और आवश्यकता पड़ने पर भीड़ को नियंत्रित करना है। गंगा तट से कितने कांवरियों ने जल भरकर यात्रा शुरू की, इसकी जानकारी सीधे देवघर स्थित समेकित मेला नियंत्रण कक्ष तक पहुंच रही है। दोनों राज्यों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। यदि देवघर में श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक होती है तो बिहार के निर्धारित पड़ावों पर भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा, जिससे मंदिर क्षेत्र में अनावश्यक दबाव न बढ़े।
रियल टाइम निगरानी से होगी भीड़ पर नजर
राजकीय श्रावणी मेला के दौरान लगभग 50 लाख श्रद्धालुओं के जलार्पण का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या को व्यवस्थित करने के लिए तकनीकी व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है। समेकित मेला नियंत्रण कक्ष से पूरे मेला क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं की आवाजाही, कतारों की स्थिति तथा प्रमुख मार्गों की जानकारी लगातार अधिकारियों तक पहुंच रही है, जिससे आवश्यकता के अनुसार तत्काल निर्णय लिया जा सके।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरों से मिलेगी भीड़ की सूचना
भीड़ प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मेला क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित 225 कैमरे लगाए गए हैं। यदि किसी होल्डिंग प्वाइंट पर क्षमता से अधिक भीड़ एकत्र होती है तो यह व्यवस्था तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना देगी। इसके बाद संबंधित अधिकारी तत्काल आवश्यक कदम उठाएंगे, ताकि भीड़ को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा पूरे मेला क्षेत्र में 1035 निगरानी कैमरों के माध्यम से प्रत्येक प्रमुख स्थान पर नजर रखी जा रही है।
पहली सोमवारी पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मेला क्षेत्र में लगभग 10 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही त्वरित कार्रवाई बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल तथा विशेष त्वरित प्रतिक्रिया दल को भी प्रमुख स्थानों पर लगाया गया है।
भीड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी तथा सुरक्षा बल लगातार तैनात रहेंगे। पहली सोमवारी को देखते हुए कई पुलिसकर्मियों की ड्यूटी अवधि भी बढ़ाई गई है, ताकि पूरे दिन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
सुबह चार बजकर दस मिनट पर खुला बाबा मंदिर का पट
रविवार देर रात मंदिर का पट बंद होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को कतार में ही रोका गया। कई भक्त पूरी रात अपनी बारी का इंतजार करते रहे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार सोमवार सुबह चार बजकर दस मिनट पर बाबा मंदिर का पट खोला गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को क्रमवार जलार्पण की अनुमति दी जाएगी। जलाभिषेक का क्रम देर शाम तक जारी रहने की संभावना है।
देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
बिहार के पूर्णिया, छपरा, किशनगंज, सिवान सहित अनेक जिलों के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंच चुके हैं। अधिकांश श्रद्धालुओं का कहना है कि सावन की पहली सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करना विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसी कारण इस दिन हर वर्ष सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है। जिला प्रशासन का मानना है कि सोमवार देर रात तक श्रद्धालुओं की कतार और लंबी हो सकती है। ऐसे में सभी विभागों को सतर्क रहने तथा श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम जलार्पण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

