
Ghatshila : सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में शनिवार को शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों में गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और अकादमिक दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष ‘रिसर्च वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शोधार्थियों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक शोध पद्धतियों, तकनीकी संसाधनों और डिजिटल टूल्स के प्रभावी उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।
शोध समाज और राष्ट्र के विकास का माध्यम: कुलाधिपति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि शोध किसी भी राष्ट्र की बौद्धिक संपदा को समृद्ध करने का सशक्त जरिया है। शोधार्थियों को अपने कार्य में मौलिकता, अनुशासन और सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे “सीखें, प्रश्न करें, विश्लेषण करें और नए ज्ञान का सृजन करें” के संकल्प के साथ आगे बढ़ें।
डिग्री तक सीमित न रहे शोध, सामाजिक समस्याओं का बने समाधान
कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि स्वतंत्र चिंतन और नवाचार की सोच पैदा करना है। शोध केवल उपाधि तक सीमित न रहकर राष्ट्र की आवश्यकताओं से जुड़ना चाहिए। वहीं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने कार्यशाला की रूपरेखा रखते हुए कहा कि शोध केवल उपाधि का माध्यम नहीं, बल्कि नए ज्ञान की खोज है। कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसा माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे शोधार्थियों का व्यावहारिक कौशल निखरे।
तकनीकी व डिजिटल संसाधनों का सही उपयोग जरूरी: प्रवीण महतो
कार्यशाला के मुख्य वक्ता व विशेषज्ञ जेसीईआरटी (JCERT) के रिसर्च एंड एचपीसी डिवीजन के संकाय सदस्य प्रवीण कुमार महतो ने शोध कौशल (Research Skills) और नवाचार (Innovation) पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने शोध समस्या की पहचान, साहित्य समीक्षा (Literature Review), डेटा विश्लेषण तथा वैज्ञानिक लेखन के विभिन्न चरणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों का संकलन ही शोध नहीं है, बल्कि उसका तार्किक विश्लेषण कर नए निष्कर्ष तक पहुंचना ही वास्तविक नवाचार है।
सत्र में उत्साह, आभार ज्ञापन के साथ समापन
तकनीकी सत्र के दौरान शोधार्थियों ने अपनी जिज्ञासाएं एवं प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञ द्वारा समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं व प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

