Home » Jharkhand Doctors Strike: डॉक्टरों ने दिया अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानीं तो 22 अक्टूबर से सरकारी-निजी अस्पतालों में काम बंद

Jharkhand Doctors Strike: डॉक्टरों ने दिया अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानीं तो 22 अक्टूबर से सरकारी-निजी अस्पतालों में काम बंद

मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट, डीएसीपी, जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड और आयुष्मान भुगतान समेत कई मांगों को लेकर डॉक्टरों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

by Kanchan Kumar
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची। झारखंड में निजी एवं सरकारी दोनों तरह की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो सकती हैं। राज्य के डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेस एसोसिएशन (झासा) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने रविवार को बैठक कर इस संबंध में फैसला लिया है। चेतावनी दी है कि यदि सरकार 21 अक्टूबर तक डॉक्टरों की मांगें नहीं मानती है, तो 22 अक्टूबर से पूरे राज्य में डॉक्टर काम बंद कर देंगे।

​इमरजेंसी सेवाएं भी रहेंगी ठप

​लिए गए फैसले के मुताबिक इस बार का आंदोलन पहले से बहुत अलग और बड़ा होगा। 22 अक्टूबर से सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लिनिक भी पूरी तरह बंद रहेंगे। यहां तक कि इमरजेंसी सेवाओं को भी ठप करने की चेतावनी दी गई है। आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. धन्वंतरी तिवारी ने रांची में हुई बैठक के बाद यह घोषणा की।

​डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों को परेशान नहीं करना चाहते। लेकिन बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं। मजबूरी में उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है।

​5 अक्टूबर से शुरू होगा विरोध प्रदर्शन

​जन-जागरूकता अभियान और काला बिल्ला लगाकर सरकार को चेताएंगे डॉक्टर
​सीधे हड़ताल पर जाने से पहले डॉक्टरों ने सरकार को संभलने का मौका दिया है। इसके लिए एक खास योजना बनाई गई है।
​5 से 8 अक्तूबर तक डॉक्टर आम लोगों के बीच जन-जागरूकता अभियान चलाएंगे। ​9 अक्टूबर को राज्यभर के डॉक्टर काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे और अपनी बात रखेंगे।

​10 से 20 अक्टूबर तक सभी जिलों में बैठकें होंगी और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद ​21 अक्तूबर को पूरे राज्य में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ​अगर 21 अक्टूबर तक भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 22 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू हो जाएगा।

​ये हैं डॉक्टरों की मुख्य मांगें

​डॉक्टरों ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें अस्पतालों में डॉक्टरों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए ‘मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट’ सख्ती से लागू हो। ​50 बेड तक के छोटे अस्पतालों और क्लिनिकों को ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ से बाहर रखा जाए। सरकारी डॉक्टरों के लिए केंद्र और बिहार की तर्ज पर डीएसीपी यानी प्रमोशन की व्यवस्था लागू की जाए।
जूनियर डॉक्टरों को समय पर स्टाइपेंड मिले और मातृत्व अवकाश की सुविधा दी जाए। ​आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान जल्द हो और पैकेज की दरें बढ़ाई जाएं। अस्पतालों के लाइसेंस और मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। ​सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो। ​आईएमए और झासा के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका मकसद स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और डॉक्टरों को सुरक्षित माहौल देना है।
Read Also: SIR 2026 : एसआईआर में नोटिस वाले मतदाताओं को कार्यालय आने की जरूरत नहीं 

 

 

 

 

Related Articles

Leave a Comment