
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच कर रही सीआईडी (CID) की टीम ने अदालत के समक्ष बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी ने आयोग की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के खिलाफ ऐसे मजबूत और पुख्ता सबूत पेश किए हैं, जिसके बाद अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
साजिश के तहत दोबारा आयोग बुलाई गईं अफसर
सीआईडी ने अदालत में दाखिल दस्तावेज और केस डायरी के हवाले से बताया कि श्वेता गुप्ता का तबादला 22 मई को ही खाद्य आपूर्ति विभाग में कर दिया गया था। उन्होंने अपने नए महकमे में पदभार भी ग्रहण कर लिया था। इसके बावजूद, 25 जून को एक विशेष आदेश निकालकर उन्हें दोबारा 15 दिनों के लिए जेपीएससी में योगदान देने को कहा गया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी।
इसी 15 दिनों के अतिरिक्त कार्यकाल के दौरान 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं OMR Sheets के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ और गड़बड़ी की गई। श्वेता गुप्ता के साथ-साथ एक अन्य अधिकारी सरोजिनी अनी तिर्की को भी इसी तरह खास निर्देशों के तहत वापस लाया गया था।
हवाई टिकट से लेकर आंसर-की लीक तक का मिला रिकॉर्ड
जांच एजेंसी द्वारा पेश की गई केस डायरी में दर्ज गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा कराने का जिम्मा संभालने वाली निजी एजेंसी टीडीपीएल और आयोग के आला अधिकारियों ने मिलकर अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। तबादला होने के बाद भी श्वेता गुप्ता, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कहने पर परीक्षा से जुड़े अति-गोपनीय कामकाज निपटा रही थीं।
इस पूरे मिलीभगत के एवज में वित्तीय लाभ और सुविधाएं देने के ठोस प्रमाण भी मिले हैं। सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि टीडीपीएल एजेंसी के निदेशकों-सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह ने श्वेता गुप्ता और उनके परिजनों के लिए हवाई यात्रा के टिकटों का इंतजाम कराया था। जांच टीम ने इन उड़ानों का पीएनआर नंबर, पैसेंजर लिस्ट, टिकट बुकिंग का समय और भुगतान से जुड़े सभी डिजिटल व कागजी ब्योरे जब्त कर अदालत में प्रस्तुत कर दिए हैं, जिससे आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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