
गढ़वा: श्री बंशीधर नगर अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय परिसर से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर हथकड़ी समेत रफूचक्कर हुआ कैदी आखिरकार कानून के शिकंजे में वापस आ गया है। चार दिनों तक पुलिस को छकाने के बाद आरोपी उमानंद पटेल ने शनिवार को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आलोक ओझा की अदालत में खुद को कानून के हवाले कर दिया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि दो-दो थानों की खाकी उसे ढूंढती रही और वह हथकड़ी समेत अदालत पहुंचकर सरेंडर करने में कामयाब हो गया।
मिली जानकारी के मुताबिक, खरौंधी थाना क्षेत्र के राजी गांव (बुतहट टोला) के रहने वाले उमानंद पटेल पर अपने ही सगे भाई पप्पू पटेल पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। भाई की शिकायत पर दर्ज केस (कांड संख्या 62/26) के सिलसिले में पुलिस टीम 23 सितंबर को उसे कोर्ट में पेश करने लाई थी।
चौकीदार को झटका देकर हो गया था फुर्र
23 सितंबर की दोपहर करीब 3:30 बजे पुलिस अधिकारी रंजीत प्रधान और दो चौकीदार रंजीत सिंह व वीरेंद्र पासवान आरोपी को लेकर कोर्ट पहुंचे थे। जज शैलेंद्र कुमार नापित की अदालत से रिमांड मंजूर होने के बाद पुलिस अफसर कस्टडी वारंट लेने के लिए कोर्ट रूम के भीतर ही रुक गए, जबकि दोनों चौकीदार आरोपी को बाहर बरामदे में लेकर खड़े थे। इसी बीच मौका ताड़कर उमानंद ने चौकीदार के हाथ से रस्सी छुड़ाई और हथकड़ी समेत नौ दो ग्यारह हो गया।
चौतरफा दबाव में आकर अपनाया सरेंडर का रास्ता
हथकड़ी समेत कैदी के भागने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। आरोपी के खिलाफ अभिरक्षा से भागने का एक और नया केस दर्ज किया गया। श्री बंशीधर नगर और खरौंधी थाने की पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। पुलिस के बढ़ते दबाव और चारों तरफ कसते शिकंजे को देखते हुए आरोपी ने वकील के जरिए गुपचुप तरीके से कोर्ट में पहुंचकर आत्मसमर्पण करने का रास्ता चुना। आरोपी के सरेंडर करते ही पुलिस ने राहत की सांस ली है।
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