Home » Dhanbad News: दिव्यागों के लिए वर्षों तक प्रेरणास्रोत बनी रही बसंती का निधन, पैरों के बदौलत सिंदरी कालेज से की थी स्नातक की पढ़ाई

Dhanbad News: दिव्यागों के लिए वर्षों तक प्रेरणास्रोत बनी रही बसंती का निधन, पैरों के बदौलत सिंदरी कालेज से की थी स्नातक की पढ़ाई

प्राथमिक विद्यालय टासरा में पारा शिक्षक के रूप में थीं कार्यरत

by Mujtaba Haider Rizvi
Basanti Singh Dhanbad inspirational story
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Dhanbad : दिव्यागों के लिए वर्षों तक स्वावलंबन की प्रेरणास्रोत रही सिंदरी की बसंती सिंह का लगभग 48 वर्ष की आयु में ईलाज के दौरान धनबाद में निधन हो गया। बसंती सिंह सिंदरी खाद कारखाने के दिवंगत कर्मचारी माधो सिंह की ज्येष्ठ पुत्री थी। चार बहनों और एक भाई के परिवार में सबसे बडी बसंती सिंह जन्म से ही दिव्यांग थी। उसके दोनों हांथ छह इंच के थे। बसंती ने दिव्यांगता के बावजूद हार नही मानी। उसने अपने पैरों को ही अपनी दिनचर्या का साधन बना लिया।

पैरों की बदौलत सिंदरी कालेज से स्नातक की और प्राथमिक विद्यालय टासरा में बसंती पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत थी। वार्ड 54 के पार्षद नीरज सिंह ने बताया कि बसंती को सीने में तकलीफ थी। उसे एसएनएमएमसीएच धनबाद ले जाया गया। वहां के चिकित्सकों ने प्रारंभिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया था।

बसंती पर बनी थी टेली फिल्म

इलाज के दौरान बसंती की मौत हो गई। बसंती सिंह वर्षो तक अपनी जीवटता को लेकर धनबाद जिला ही नही बल्कि पूरे झारखंड में दिव्यांगों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रही। बसंती सिंह पर टेली फिल्म भी बनाई गई थी। सभी समाचार पत्रों के सुर्खियों में भी बसंती हमेशा बनी रही। बसंती सिंह ने बताया थाकि तंत्र ने उसके लिए कुछ नही किया। वह चाहती थी कि शिक्षिका के रूप में उसे स्थायी किया जाए। बसंती ने इसके लिए शासन से लेकर प्रशासन और तंत्र से भरपूर पत्राचार की थी।

आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला था

आश्वासन मिला परंतु मिला कुछ नही। सिंदरी के डोमगढ में बसंती अपने भाई निरंजन सिंह और बहन के साथ रहती थी। बसंती सिंह का अंतिम संस्कार दामोदर नदी के सिंदरी श्मशान घाट पर किया गया।

Read Also: Jharkhand Governor: हिंदू जनजागृति समिति का शिष्टमंडल राज्यपाल से मिला; छात्रों में बढ़ते Digital Addiction पर जताई चिंता

Related Articles

Leave a Comment