Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम के जिला मुख्यालय चाईबासा में उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इफ्को टोक्यो जनरल इंश्योरेंस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने परिवादी बसंत कुमार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा भुगतान का निर्देश दिया।
मामला चाईबासा के रानी कॉलोनी निवासी बसंत कुमार से जुड़ा है, जिन्होंने अपने हाइवा वाहन (संख्या JH05AY6141) का बीमा उक्त कंपनी से कराया था। 19 फरवरी 2024 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके बाद उन्होंने नियमानुसार बीमा दावा दाखिल किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन ओवरलोड था, जो पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन है। इस पर बसंत कुमार ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और चालान संख्या 14021 एवं 14024 की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वाहन निर्धारित सीमा के भीतर लोड था और दुर्घटना के समय दूसरे फेरे में चल रहा था। ऐसे में ओवरलोडिंग का दावा गलत पाया गया।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के बीमा दावा अस्वीकार करना न केवल सेवा में कमी है, बल्कि यह अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सूचना देने में देरी को आधार बनाकर दावा खारिज नहीं किया जा सकता, जब तक इससे कंपनी को वास्तविक नुकसान साबित न हो। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर कुल एक लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें 70 हजार रुपये बीमा दावा, 20 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और 10 हजार रुपये वाद व्यय शामिल हैं। तय समय में भुगतान नहीं करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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