Chaibasa : जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एफडी के नाम पर बीमा पॉलिसी बेचने के मामले को गंभीर मानते हुए इसे अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया है। आयोग ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को उपभोक्ता की पूरी राशि लौटाने के साथ मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र के तुईबाना गांव की लक्ष्मी पुर्ती ने दायर किया था। लक्ष्मी पुर्ती अपनी माता जेमा कुई पुर्ती के साथ एसबीआई की चाईबासा शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट कराने गई थीं। इसी दौरान बैंक कर्मियों ने उन्हें एसबीआई लाइफ के प्रतिनिधि के पास भेज दिया, जहां कुछ दस्तावेजों पर दस्तखत करा लिए गए। बाद में उन्हें पता चला कि एफडी के बजाय 2 लाख रुपये की ‘रिटायर स्मार्ट प्लस’ बीमा पॉलिसी कर दी गई है।
लक्ष्मी पूर्ति ने बताया कि उन्हें एफडी का भरोसा दिलाया गया था। जब उन्होंने पॉलिसी रद्द कर राशि वापस मांगी, तो कंपनी की ओर से कोई मदद नहीं मिली। यही नहीं, ऑटो-डेबिट के जरिए फिर 2 लाख रुपये उनके खाते से काट लिए गए। इससे उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी।
मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने साफ कहा कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि उपभोक्ता को बीमा योजना की पूरी जानकारी दी गई थी। आयोग ने माना कि एफडी बताकर बीमा पॉलिसी बेचना उपभोक्ता के साथ धोखा है।
आयोग ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर कुल 4.30 लाख रुपये शिकायतकर्ता को लौटाए। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 40 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये का भुगतान भी करे। तय समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।
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