चाईबासा : भारतीय जनता पार्टी की ओर से बुधवार को चक्रधरपुर के मध्य विद्यालय आसनतलिया मैदान में वीबी जी राम जी अर्थात विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) की जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
मौके पर सुदर्शन भगत ने कहा कि वीबी जी राम जी पर विपक्ष अनर्गल बयानबाजी कर जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। यह किसी अधिनियम में पहली बार संशोधन नहीं है। वीबी जी राम जी मजदूरों और किसानों के हित में है। हमें इसमें गांव के लोगों तक परिवर्तन की बातों को पहुंचाना होगा। अब सीधे खाते में राशि जाएगी और किसी प्रकार के भ्रष्टाचार का अवसर नहीं मिलेगा।
किसानों के लिए बोआई और कटाई की 60 दिन का अवकाश का समय रहेगा। इस अवधि में उन्हें बेरोजगार भत्ता दिया जाएगा। पहले 15 दिन में भी मजदूरी का भुगतान नहीं होता था। अब हफ्ते में भुगतान किया जाएगा। वहीं इसमें राम जी का नाम होने के कारण विपक्षियों के पेंट में दर्द हो रहा है। इस अधिनियम से गांवों से पलायन रूकेगा, रोजगार मिलेगा और संसाधन बढ़ेंगे। अब 40% राशि राज्य को देनी होगी, जिससे झामुमो सरकार परेशान है।
पहले 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी। लेकिन अब 125 दिन के रोजगार की गारंटी है। भाजपा के प्रदेश सह संयोजक दिनेश कुमार ने रोजगार गारंटी योजना के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनरेगा का मतलब केवल लूट खसोट करना होता था। अब कच्चे और पक्के दोनों काम होंगे। पहले केवल कच्चा काम होता था। अब राशि की चोरी और बंदरबांट का काम नहीं हो पाएगा। एआइ और जियो टैग से इस पर लगाम लगेगी।
मनरेगा में पहले 75 और 25% का रेशियो था। अब केंद्र 60 और राज्य 40% राशि भुगतान करेगी। जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में 90 फीसद राशि केंद्र सरकार देगी। वहीं सिंहभूम की पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कहा कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम है। तो घोटाला नहीं होना चाहिए था। मनरेगा घोटाले से झामुमो और कांग्रेस नेताओं की जेबें गर्म हुईं। हमें जानना होगा कि उनके पेट में दर्द क्यों हो रहा है। बिगड़े बच्चों को सुधारने के लिए ही पीएम नरेंद्र मोदी ने 60-40 का रेशियो लगा दिया है।
कार्यशाला में झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक षाडंगी, पूर्व विधायक गुरुचरण नायक, पूर्व विधायक शशिभूषण, पोड़ाहाट के जिलाध्यक्ष दीपक पासवान, मालती गिलुवा, विमला प्रसाद, संजय पासवान, संजय मिश्रा, अनूप दूबे, तीरथ जामुदा, सुरेश साव, गोरखनाथ डारे बोदरा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

