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Diwali 2026 : देशभर में आज दीपावली की धूम, शाम को होगी मां लक्ष्मी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और भाई दूज तक के पर्वों की तारीख

by Rakesh Pandey
Diwali 2026
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फीचर डेस्क : देशभर में रविवार, 8 नवंबर को दीपावली का त्योहार धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही घरों और बाजारों में पर्व की रौनक देखने को मिल रही है। लोगों ने अपने घरों को दीपों, फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया है। शाम होते ही घरों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की प्रदोष बेला में माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इस बार रांची में लक्ष्मी पूजा का शुभ समय शाम 5:32 बजे से 7:30 बजे तक निर्धारित है। वहीं, प्रदोष काल शाम 5:07 बजे से 7:41 बजे तक रहेगा। दीपावली के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

शाम 5:32 बजे से लक्ष्मी पूजा का शुभ समय

दीपावली के दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। रांची में रविवार को लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:32 बजे से रात 7:30 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:07 बजे से 7:41 बजे तक निर्धारित है।

लोग शुभ मुहूर्त में पूजा की तैयारी करेंगे। घरों में पूजा स्थल को साफ करके सजाया जाएगा। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से आराधना की जाएगी। पूजा के दौरान दीप जलाने, पुष्प अर्पित करने और प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है।

अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के अनुसार पूजा के मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करना चाहिए।

धनतेरस से शुरू हुआ पांच दिवसीय दीपोत्सव

दीपावली का उत्सव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज तक पांच दिनों तक अलग-अलग पर्व मनाए जाते हैं। इस दौरान धन, आरोग्य, समृद्धि, प्रकृति और भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं।

इस वर्ष 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी और मुख्य दीपावली का पर्व एक ही दिन पड़ रहा है। नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहा जाता है। इस दिन दीपदान और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। दीपावली की रात कई स्थानों पर मां काली की विशेष पूजा भी आयोजित की जाती है।

10 नवंबर को होगी गोवर्धन पूजा और अन्नकूट

दीपावली के बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसी प्रसंग की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा के अवसर पर घरों और मंदिरों में अन्नकूट का भोग तैयार किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के पकवान और खाद्य पदार्थ भगवान को अर्पित किए जाते हैं। इस पर्व का संबंध प्रकृति, कृषि, गौवंश और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने से भी है।

11 नवंबर को मनाया जाएगा भाई-बहन के प्रेम का पर्व

पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन 11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

भाई भी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाई दूज का संबंध यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है। इसी कारण इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।

अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

दीपावली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत व्यापक है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा को दीपावली के उत्सव से जोड़कर देखा जाता है।

देश के अलग-अलग राज्यों में दीपावली मनाने की परंपराएं अलग हो सकती हैं। कहीं मां लक्ष्मी की विशेष आराधना होती है, तो कहीं मां काली की पूजा का विशेष महत्व है। व्यापारी वर्ग नए लेखा-जोखा और कारोबार की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ मानता है।

दीपों की रोशनी, पूजा-अर्चना, मिठाइयों और पारिवारिक मेल-मिलाप के बीच दीपावली का पर्व सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश भी देता है। धनतेरस से शुरू हुआ यह उत्सव भाई दूज तक धार्मिक उल्लास और पारिवारिक परंपराओं के साथ जारी रहेगा।

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