
Jamshedpur : औद्योगिक नगरी जमशेदपुर के सोनारी एयरपोर्ट पर व्यावसायिक विमान सेवाएं बंद होते ही सुरक्षा व्यवस्था भी हटा ली गई है। हैरानी की बात यह है कि एयरपोर्ट से भले ही नियमित कमर्शियल उड़ानों का संचालन बंद हो गया हो, लेकिन यहां विमानन गतिविधियां अब भी जारी हैं। फ्लाइंग क्लब के प्रशिक्षण विमान रोजाना उड़ान भर रहे हैं। वहीं, टाटा समूह समेत अन्य कॉर्पोरेट घरानों के चार्टर्ड विमानों की आवाजाही भी बनी हुई है। इसके बावजूद एयरपोर्ट परिसर में आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा जांच के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं है। इससे एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
74 प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को वापस बुलाया
सोनारी एयरपोर्ट से उड़ान योजना के तहत इंडिया वन एयर की ओर से जमशेदपुर से कोलकाता और भुवनेश्वर के बीच व्यावसायिक विमान सेवाएं संचालित की जा रही थीं। इन सेवाओं के स्थायी रूप से बंद होने के बाद राज्य सरकार ने एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सभी 74 पुलिसकर्मियों को वापस बुला लिया।
इनमें चार सब-इंस्पेक्टर (SI), आठ असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और 62 पुलिस जवान शामिल थे। खास बात यह है कि इन सभी कर्मियों को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) की ओर से 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद परीक्षा पास करने पर ही उन्हें एयरपोर्ट की सुरक्षा में लगाया गया था।
12 अक्टूबर को जारी हुआ था वापसी का आदेश
झारखंड पुलिस की विशेष शाखा ने 12 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अधिकारियों और जवानों को रांची स्थित एपीएसयू (APSU) मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया था। आदेश में पूर्वी सिंहभूम के पुलिस उपाधीक्षक (विशेष शाखा) के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया था कि एयरपोर्ट से व्यावसायिक विमान सेवाएं बंद हो चुकी हैं।
पुलिस बल की वापसी के साथ ही सुरक्षा जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और मेटल डिटेक्टर भी हटा लिए गए। इन्हें संबंधित विभाग में जमा करा दिया गया है। इस तरह एयरपोर्ट पर पहले से लागू सुरक्षा जांच की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई।
60 से अधिक ट्रेनी पायलट, चार्टर्ड विमानों की भी आवाजाही
सोनारी एयरपोर्ट पर व्यावसायिक उड़ानें बंद होने का मतलब यह नहीं है कि यहां विमानों का परिचालन भी रुक गया है। वर्तमान में 60 से अधिक युवा फ्लाइंग क्लब के माध्यम से पायलट बनने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनके प्रशिक्षण विमान नियमित रूप से उड़ान भरते हैं।
इसके अलावा टाटा समूह और दूसरे कॉर्पोरेट घरानों के चार्टर्ड विमान भी यहां आते-जाते रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एयरपोर्ट पर विमानन गतिविधियां जारी हैं, तो परिसर में प्रवेश करने वालों की सुरक्षा जांच के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
पहले एयरपोर्ट में प्रवेश के दौरान लोगों की फ्रिस्किंग की जाती थी और मेटल डिटेक्टर से जांच होती थी। लेकिन पुलिस बल और सुरक्षा उपकरणों की वापसी के बाद यह प्रक्रिया बंद हो गई है।
टाटा स्टील और राज्य सरकार के बीच बंटी है जिम्मेदारी
इस मामले में टाटा स्टील के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि सोनारी एयरपोर्ट का एक हिस्सा कंपनी के नियंत्रण में है और उस हिस्से की सुरक्षा की जिम्मेदारी टाटा स्टील निभाती है। वहीं, एयरपोर्ट का दूसरा हिस्सा राज्य सरकार के नियंत्रण में है। इसलिए उस हिस्से की सुरक्षा व्यवस्था राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है।
हालांकि, 74 प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को वापस बुलाने और सुरक्षा उपकरण हटाए जाने के बाद राज्य सरकार के नियंत्रण वाले हिस्से में वैकल्पिक सुरक्षा इंतजाम नहीं होना चिंता का विषय है। नियमित व्यावसायिक उड़ानें बंद होने के बावजूद प्रशिक्षण और चार्टर्ड विमानों का परिचालन जारी है। ऐसे में एयरपोर्ट की सुरक्षा को केवल कमर्शियल उड़ानों से जोड़कर देखना कितना उचित है, यह बड़ा सवाल है।
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