
रांची : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को 387 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां दी गयीं। इनमें 335 स्नातक, 48 स्नातकोत्तर और चार पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किये गये। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करते हुए कृषि शिक्षा और अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि कृषि अनुसंधान की सफलता प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका परिणाम किसान के खेत में दिखाई देना चाहिए। ऐसी तकनीक विकसित करने की जरूरत है, जिससे कम भूमि और सीमित संसाधनों में उत्पादन व किसानों की आय बढ़े, लागत घटे तथा मिट्टी और जल का संरक्षण हो।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, जल संकट और मृदा स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों के बीच कृषि में विज्ञान और नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एआई, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, सटीक कृषि और आधुनिक सिंचाई जैसी तकनीकों को तभी उपयोगी माना जायेगा, जब वे किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें।
झारखंड की कृषि परिस्थितियों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पठारी भू-भाग के कारण वर्षाजल का बड़ा हिस्सा बह जाता है। ऐसे में जल संरक्षण, वर्षाजल के बेहतर इस्तेमाल, सिंचाई के विस्तार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधीकरण पर अधिक ध्यान देना होगा।
उन्होंने कृषि आधारित स्टार्टअप, खाद्य प्रसंस्करण, बागवानी, पशुपालन और मत्स्यपालन को युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के संभावनाओं वाले क्षेत्र बताया। युवाओं से रोजगार तलाशने के साथ रोजगार के नये अवसर पैदा करने की दिशा में भी काम करने को कहा।
समारोह में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और बीएयू के कुलपति डॉ. एससी दुबे समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद थे। राज्यपाल ने छात्राओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए शिक्षा, विज्ञान, कृषि अनुसंधान और उद्यमिता में उनकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के निधन पर भी शोक जताया।

