
Jamshedpur News : विद्यार्थियों और शिक्षकों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा आत्महत्या की रोकथाम को लेकर संवेदनशील वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से छोटा गोविंदपुर स्थित विवेक विद्यालय में “क्यूपीआर (Question, Persuade, Refer)” आधारित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर संवाद करने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेषज्ञों ने बताए आत्महत्या के चेतावनी संकेत
सत्र का संचालन टाटा मोटर्स अस्पताल, जमशेदपुर के मनोचिकित्सा विभाग की विशेषज्ञ डॉ. रोसाली भोई एवं डॉ. डिंपल मेलवानी ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को आत्महत्या के संभावित चेतावनी संकेतों की पहचान करने, प्रभावित व्यक्ति से संवेदनशीलता के साथ संवाद स्थापित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता और उचित रेफरल की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने पर जोर
विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों और कलंक को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, सक्रिय रूप से सुनना, समय रहते हस्तक्षेप करना तथा ज़रूरतमंद व्यक्ति को पेशेवर सहायता तक पहुंचाना किसी भी जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सत्र के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।
समग्र विकास के लिए भावनात्मक सुरक्षा भी जरूरी: प्राचार्य
विद्यालय के प्राचार्य अवधेश सिंह ने कहा कि विद्यालय केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास और उनकी भावनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी दायित्व निभाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करते हैं। विद्यालय का उद्देश्य एक सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना है।
विशेषज्ञों का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार ने विशेषज्ञ चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ-साथ एक संवेदनशील, सहयोगी और स्वस्थ विद्यालय संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

