
Jamshedpur : एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती 12 वर्षीय बच्चे हरिश बिरुली की मौत के बाद इलाज में लापरवाही के आरोपों ने अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद सीनियर डॉक्टर उसे देखने नहीं पहुंचे। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने की बात कही है।
चाईबासा के झींकपानी थाना क्षेत्र के मतकमहातु गांव निवासी हरिश बिरुली और उसकी चार वर्षीय बहन ज्योति बिरुली को गुरुवार को मलेरिया के लक्षण के बाद एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। दिन में पीजी प्रथम वर्ष के एक जूनियर डॉक्टर ने दोनों बच्चों का इलाज शुरू किया, लेकिन हरिश की हालत लगातार बिगड़ती गई।
परिजनों के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात सीनियर डॉक्टरों से बच्चे को समय पर चिकित्सकीय देखरेख नहीं मिली। जूनियर डॉक्टर सीनियर की सलाह के आधार पर इलाज कर रहा था। रात करीब 9.30 बजे हरिश की मौत हो गई।
बच्चे की मां शांति ने बताया कि दिन में एक डॉक्टर ने इलाज किया था, लेकिन इसके बाद कोई सीनियर डॉक्टर उसके बेटे को देखने नहीं आया। दोपहर करीब तीन बजे कुछ दवाएं बाहर से लाने के लिए कहा गया था। मां के साथ उसकी चार वर्षीय बेटी भी अस्पताल में भर्ती थी और मदद के लिए परिवार का कोई दूसरा सदस्य मौजूद नहीं था। इस कारण वह दवा लेने बाहर नहीं जा सकी।
हरिश की मौत के बाद सुबह शांति अपनी बीमार बेटी ज्योति को लेकर गांव लौट गई। उन्होंने बताया कि पति की पहले ही मौत हो चुकी है और अब परिवार में वह और उसकी बेटी ही बची हैं।
शिशु रोग विभाग की प्रभारी अध्यक्ष डॉ. बिनीता नैंसी ने बताया कि पीजी द्वितीय वर्ष के डॉक्टर सलमान गुरुवार को ड्यूटी पर नहीं थे। फोन पर पूछताछ में उन्होंने आकस्मिक कारणों से छुट्टी पर जाने की बात कही, लेकिन विभाग की ओर से छुट्टी की अनुमति नहीं दी गई थी और न ही इसकी पूर्व सूचना दी गई थी। ऐसे में उन्हें ड्यूटी से अनुपस्थित माना गया है।
वहीं, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर नितेश ने ड्यूटी रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज की थी। लेकिन मरीज को देखने क्यों नहीं पहुंचे, इसकी जानकारी लेने के लिए शुक्रवार को उन्हें बुलाया गया, हालांकि वे अस्पताल प्रबंधन के समक्ष उपस्थित नहीं हुए।
डॉ. नैंसी ने कहा कि दोनों डॉक्टरों की ड्यूटी से अनुपस्थिति और बच्चे के इलाज से जुड़े पूरे मामले की जांच की जाएगी। जांच में किसी भी डॉक्टर की लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध डॉक्टर ने बच्चे का इलाज किया था, लेकिन हरिश गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचा था और उसे बचाया नहीं जा सका।
एमजीएम अस्पताल में इलाज में लापरवाही और चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ताजा घटना ने एक बार फिर गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख मिलने और अस्पताल की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।


