
विभागीय स्तर पर सितंबर तक निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का है लक्ष्य
सभी जिलों में जरूरत के हिसाब से कंबलों का किया जाएगा वितरण
जिलों से प्रखंड, अंचल और पंचायत स्तर तक उपलब्ध कराए जाएंगे कंबल
रांची : जाड़े में ठंड से बचाव के लिए झारखंड के गरीब और जरूरतमंद लोगों में इस वर्ष करीब 10 लाख कंबल बांटे जाएंगे। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कंबल खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंबलों की खरीद की तैयारी पूरी कर सितंबर तक निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू करायी जाएगी, ताकि जाड़े का मौसम शुरू होने से पहले कंबल जिलों तक पहुंचाए जा सकें।
बता दे कि कंबल एवं वस्त्र वितरण योजना के तहत हर वर्ष ठंड के मौसम में जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल वितरित किए जाते हैं। इस वर्ष भी समय पर कंबल उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों में जरूरत के अनुसार कंबलों का वितरण किया जाएगा। जिला स्तर से कंबल प्रखंड, अंचल और पंचायत स्तर तक भेजे जाएंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर चिह्नित जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके।
गरीब, दिव्यांग और भिक्षुकों को प्राथमिकता
योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले वृद्ध, दिव्यांग, विधवा, भूमिहीन, बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए लोगों तथा भिक्षुकों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिलों में जरूरत के आकलन के आधार पर कंबलों का आवंटन किया जाएगा। इसके बाद संबंधित स्तर पर लाभुकों के बीच वितरण कराया जाएगा।
दो किलो वजन और विभाग का अंकित रहेगा लोगो
निदेशालय की ओर से कंबल की गुणवत्ता और आकार के लिए तकनीकी मानक भी तय किये गये हैं। खरीदे जाने वाले कंबल मिंक क्लाउडी श्रेणी के होंगे। इनका आकार करीब 60 गुणा 90 इंच और वजन करीब दो किलोग्राम होगा। कंबल पर झारखंड सरकार, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड, रांची का लोगो लगाया जाना अनिवार्य होगा। इससे आपूर्ति किए जाने वाले कंबलों की विभागीय पहचान भी स्पष्ट रहेगी।
जरूरत के अनुसार बढ़ाई जाएगी संख्या
निदेशालय के अनुसार, खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंबलों की आपूर्ति राज्य के सभी जिलों में उनकी जरूरत के अनुरूप की जाएगी। इसके बाद जिला प्रशासन और संबंधित स्थानीय स्तर की व्यवस्था के माध्यम से प्रखंड, अंचल और पंचायत स्तर तक कंबल पहुंचाए जाएंगे। प्रयास है कि ठंड बढ़ने के समय जरूरतमंदों को कंबल के लिए इंतजार नहीं करना पड़े। सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से इस वर्ष करीब 10 लाख कंबलों की खरीद का अनुमान रखा गया है। वास्तविक संख्या जरूरत के अनुसार कम या अधिक हो सकती है।


