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Jharkhand Registry Office : झारखंड के 42 रजिस्ट्री कार्यालयों में जमीन की रजिस्ट्री ठप, सर्वर खराब होने से करोड़ों के राजस्व पर असर

सर्वर में आई खराबी का असर केवल कार्यालयों में होने वाली रजिस्ट्री पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि जमीन और संपत्ति से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

by Rakesh Pandey
Jharkhand Registry Office
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रांची : झारखंड में जमीन और संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ गई है। राज्य के सभी 42 निबंधन कार्यालयों में पिछले कई दिनों से तकनीकी खराबी के कारण रजिस्ट्री का काम प्रभावित है। सर्वर ठप होने की वजह से जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों के दस्तावेजों के निबंधन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हो गए हैं और रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ रहा है।

सर्वर में आई खराबी का असर केवल कार्यालयों में होने वाली रजिस्ट्री पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि जमीन और संपत्ति से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। आवेदन जमा करने से लेकर दस्तावेजों के निष्पादन तक की प्रक्रिया बाधित होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अहम बात यह है कि सर्वर की तकनीकी समस्या कब तक ठीक होगी, इसे लेकर आवेदकों को फिलहाल स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है।

झारखंड के 42 रजिस्ट्री कार्यालयों में काम प्रभावित

राज्य में जमीन और संपत्ति के दस्तावेजों के निबंधन का काम निबंधन कार्यालयों के माध्यम से होता है। सर्वर में तकनीकी खराबी आने के बाद प्रदेश के सभी 42 रजिस्ट्री कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ है। जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेज लेकर कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन सर्वर काम नहीं करने के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। कई आवेदकों को अपनी बारी और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

इस तकनीकी समस्या के कारण लंबित आवेदनों की संख्या भी बढ़ रही है। जिन लोगों ने पहले से जमीन या संपत्ति के निबंधन के लिए समय और अन्य जरूरी तैयारियां कर रखी थीं, उनके सामने अब नई परेशानी खड़ी हो गई है।

जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोग लौट रहे खाली हाथ

सर्वर ठप होने का सबसे सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। जमीन या मकान की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों का निबंधन कराने के लिए लोग रजिस्ट्री कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण उन्हें अपना काम पूरा किए बिना वापस लौटना पड़ रहा है। कई मामलों में खरीदार और विक्रेता पहले से तय प्रक्रिया के अनुसार कार्यालय पहुंचे, लेकिन सर्वर उपलब्ध नहीं होने के कारण दस्तावेजों का निबंधन नहीं हो सका। इससे लोगों को दोबारा कार्यालय आने की स्थिति बन रही है।

रजिस्ट्री में देरी का असर उन लोगों पर भी पड़ रहा है, जिन्होंने संपत्ति की खरीद-बिक्री के लिए अन्य प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। निबंधन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से संबंधित दस्तावेजों का अंतिम काम भी अटक गया है।

ऑनलाइन जमीन संबंधी सेवाओं पर भी असर

तकनीकी खराबी का प्रभाव केवल रजिस्ट्री कार्यालय में होने वाले प्रत्यक्ष काम तक सीमित नहीं है। जमीन और संपत्ति से संबंधित ऑनलाइन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। आवेदन जमा करने, दस्तावेजों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और निबंधन से जुड़े कार्यों के निष्पादन में परेशानी आ रही है। इससे उन लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं, जो ऑनलाइन माध्यम से अपने आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं। सर्वर की समस्या लंबे समय तक बनी रहने पर लंबित आवेदनों का दबाव और बढ़ सकता है। इससे रजिस्ट्री कार्यालयों में काम सामान्य होने के बाद भी बड़ी संख्या में आवेदनों के निपटारे की चुनौती सामने आ सकती है।

रोजाना 700 से 900 रजिस्ट्री का काम

सामान्य दिनों में झारखंड के रजिस्ट्री कार्यालयों में जमीन और संपत्ति से जुड़े बड़ी संख्या में दस्तावेजों का निबंधन होता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में प्रतिदिन करीब 700 से 900 रजिस्ट्री की जाती हैं। रजिस्ट्री के माध्यम से सरकार को स्टांप शुल्क और अन्य मदों से राजस्व प्राप्त होता है। सामान्य दिनों में इससे प्रतिदिन करीब 3 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक का राजस्व सरकार को मिलने का अनुमान है। ऐसे में कई दिनों तक निबंधन व्यवस्था प्रभावित रहने से सरकारी राजस्व संग्रह पर भी सीधा असर पड़ रहा है। रजिस्ट्री का काम जितने दिनों तक बाधित रहेगा, राजस्व प्राप्ति में उतनी ही कमी आने की संभावना है।

सर्वर कब तक होगा ठीक, स्थिति स्पष्ट नहीं

रजिस्ट्री कार्यालयों में काम प्रभावित होने के बावजूद सबसे बड़ी चिंता यह है कि सर्वर की तकनीकी समस्या कब तक दूर होगी, इसकी स्पष्ट समयसीमा आवेदकों को नहीं मिल पा रही है। इसके कारण जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े लोग आगे की प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं। तकनीकी समस्या दूर होने के बाद लंबित आवेदनों का निपटारा करना भी विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगा। लंबे समय से रुके आवेदनों के कारण कार्यालयों में काम का दबाव बढ़ सकता है।

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