RANCHI: झारखंड में फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन को लेकर सरकार ने जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की है। जिसके तहत प्रचार-प्रसार के लिए प्रचार रथ को रवाना किया गया। ये रथ 14 जिलों में जाकर लोगों को जागरूक करेगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने फाइलेरिया रोधी दवा खाकर अभियान की शुरुआत की। मौके पर एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी बिरेंद्र कुमार सिंह, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि डॉ. अभिषेक और परिमल संस्था के पदाधिकारी, जिला परिषद अध्यक्ष, एएनएम, चिकित्सक, प्रखंड प्रमुख, मुखिया, सहिया समेत अन्य मौजूद रहे।

घर-घर जाकर खिलाई जाएगी दवा
जागरूकता रथ को रवाना करने के बाद फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। जिसमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे सफल बनाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक पूरे झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाना है। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा खिलायेंगे। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे बिना किसी संकोच के दवा का सेवन करें।
कई जिलों में खुलेंगे मेडिकल कालेज
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में यह अभियान 14 जिलों में संचालित किया जा रहा है, जबकि 9 जिलों में पहले ही यह अभियान संपन्न किया जा चुका है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य के महत्वपूर्ण जिलों में शीघ्र ही मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि फाइलेरिया रोकथाम योग्य बीमारी है। समय पर और शत-प्रतिशत दवा से इस रोग को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दी जा रही दवा का अवश्य सेवन करें और इस अभियान को सफल बनाएं। जिससे कि झारखंड को फाइलेरिया मुक्त राज्य बनाया जा सके।
सभी लोगों को खिलाई जाएगी दवा
एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि फाइलेरिया गंभीर और खतरनाक बीमारी है। जिसमें हाथ-पैर हाथीपांव जैसे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार बीमारी हो जाने के बाद इसका इलाज अत्यंत कठिन हो जाता है। इसलिए बचाव ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है। इसके लिए फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को छोड़कर सभी स्वस्थ व्यक्तियों को यह दवा अवश्य लेनी चाहिए।
ऐसे करें बचाव
उन्होंने बीमारी के कारणों पर प्रकाश डालते हुए जल जमाव को रोकने, मच्छरदानी के उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही स्वयंसेवी संगठनों, जेएसएलपीएस, पीडीएस डीलरों, सहिया और अन्य सहयोगियों से शत-प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि जरा-सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी बिरेंद्र कुमार सिंह ने जिलों से आए सभी पदाधिकारियों से कहा कि हर व्यक्ति फाइलेरिया की दवा खाए यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेवारी है। यदि कोई व्यक्ति दवा लेने से इंकार करता है, तो उसे प्रेरित कर समझाया जाए।
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