
रांची: झारखंड के सबसे चर्चित और बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वित्तीय हेरफेर के नए-नए पन्ने खुलते जा रहे हैं। इस पूरे मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब अपनी जांच का दायरा झारखंड की सीमाओं से बाहर फैला दिया है। कारोबारी विनय कुमार सिंह और उनकी कंपनियों के जरिए किए गए संदिग्ध निवेशों का सच पता लगाने के लिए ईडी ने देश की दो राज्य सरकारों को औपचारिक पत्र भेजकर गोपनीय ब्योरा मांगा है।
अदालत में खुली लेन-देन की पोल
ईडी ने हाल ही में विशेष अदालत में सौंपी गई अपनी स्टेटस रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है कि जांच की सुई अब विनय सिंह और उनकी पत्नी सिमरन सिंह के कारोबारी नेटवर्क पर जाकर टिक गई है। दोनों से जुड़ी ‘नेक्सटेजन सॉल्यूशंस टेक्नोलॉजी’ नाम की कंपनी में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन पाए गए हैं।
दस्तावेजों के खंगालने पर यह बात सामने आई है कि साल 2019 से लेकर 2023 के बीच कंपनी की ओर से सिमरन सिंह को हर महीने करीब 1.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।
अदालत को दी गई जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस बात का गहराई से आकलन कर रही है कि इन कंपनियों का वास्तविक कामकाज क्या था और क्या यह रकम किसी तय सेवा के बदले दी गई थी या फिर यह महज पैसों को सफेद करने की एक सोची-समझी तरकीब थी।
24 घंटे में 3 करोड़ की निकासी से गहराया शक
जांच अधिकारियों का ध्यान सबसे ज्यादा एक खास लेन-देन ने खींचा है, जहां विनय सिंह और उनके जुड़े बैंक खातों से एक ही दिन के भीतर लगभग 3 करोड़ रुपये कैश अकाउंट से निकाले गए। एक ही दिन में इतनी बड़ी रकम की निकासी ने वित्तीय धांधली के अंदेशे को और गहरा कर दिया है। ईडी यह पता लगा रही है कि आखिर इस मोटी रकम को निकालने के पीछे क्या मकसद था और इसे किस काम या व्यक्ति के पास पहुंचाया गया।
दूसरे राज्यों में संपत्ति और मनी ट्रेल की पड़ताल
एजेंसी के पास ऐसे पुख्ता इनपुट हैं कि शराब घोटाले से अर्जित कमाई का एक बड़ा हिस्सा केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे दूसरे पड़ोसी राज्यों में चल-अचल संपत्तियों की खरीद में खपाया गया है। इसी ‘मनी ट्रेल’ (पैसों के आने-जाने के रास्ते) को ट्रैक करने के लिए ईडी ने दो अलग-अलग राज्यों के प्रशासनिक तंत्र से संपर्क साधा है।
फिलहाल, विनय सिंह द्वारा बनाई गई विभिन्न फर्जी व सहयोगी कंपनियों, अचल जायदाद में किए गए निवेश और ट्रांसफर की गई रकम के तमाम कागजात खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि दोनों राज्यों से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी और बैंक खातों के फॉरेंसिक ऑडिट के बाद ही इस पूरे शराब घोटाले के असली मास्टरमाइंड और काली कमाई के अंतिम ठिकाने की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।
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