रांची : लंबित मांगों को लेकर झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। संगठन की ओर से नागा बाबा खटाल, लोक भवन के सामने राज्य स्तरीय महाधरना शुरू किया जा रहा है। आंदोलन की शुरुआत राज्य के 156 दिवंगत मनरेगा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की जाएगी। मनरेगा कर्मचारी संघ की बैठक में आंदोलन के रणनीति बनाई गई।
बता दे कि मनरेगा कर्मी 12 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। संघ का कहना है कि ग्रेड-पे आधारित वेतनमान, स्थायी समायोजन, सेवा सुरक्षा, दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति और समुचित मुआवजा समेत कई मांगों को लेकर लगातार आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
संघ का आरोप है कि लंबे समय से आंदोलनरत रहने के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है। इसी के विरोध में अब आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया है। 16 जून को धरना स्थल पर सरकार की सद्बुद्धि और सकारात्मक पहल की कामना के साथ यज्ञ-हवन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो 17 जून से आमरण अनशन और भूख हड़ताल शुरू होगी।
आंदोलन के अगले चरण में 19 जून को धरना स्थल से जयपाल सिंह स्टेडियम तक मानव श्रृंखला बनाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संघ का कहना है कि राज्य के मनरेगा कर्मी पिछले 98 दिनों से आंदोलनरत हैं और अब किसी भी कीमत पर अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
संघ के अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय ने कहा कि मनरेगा कर्मियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। सरकार को जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
सरकार की चेतावनी के बावजूद नहीं झुके कर्मी
हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने मनरेगा कर्मियों को काम पर लौटने की चेतावनी दी है। सरकार की ओर से हड़ताल में शामिल कर्मियों की 9 वर्षों की सेवा अवधि तक समाप्त करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही गई है। नो वर्क-नो पे भी लागू है। सभी जिलों से लगातार चेतावनी का निर्देश जारी किया जा रहा है। इसके बावजूद मनरेगा कर्मचारी संघ ने साफ कर दिया है कि मांगों पर ठोस निर्णय लिए बिना वे काम पर नहीं लौटेंगे। संघ का कहना है कि यह लड़ाई अब सम्मान और अधिकार की है, जिसे हर हाल में अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
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