Home » Jharkhand politics: ​नीलांबर-पीतांबर यूनिवर्सिटी के कुलपति पर शिकंजा कसने की तैयारी, वित्त मंत्री ने राजभवन में दर्ज कराई शिकायत

Jharkhand politics: ​नीलांबर-पीतांबर यूनिवर्सिटी के कुलपति पर शिकंजा कसने की तैयारी, वित्त मंत्री ने राजभवन में दर्ज कराई शिकायत

by Kanchan Kumar
ranchi lok bhawan jharkhand
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

​रांची: झारखंड के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में चल रही आर्थिक गड़बड़ियों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की और कुलपति को उनके पद से तुरंत हटाने की अपील की।
​वित्त मंत्री ने राज्यपाल को सौंपे अपने पत्र में यूनिवर्सिटी के भीतर हुई भारी वित्तीय गड़बड़ियों का ब्योरा दिया है।

दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की आशंका

उन्होंने आशंका जताई है कि यदि डॉ. दिनेश कुमार सिंह पद पर बने रहते हैं, तो मामले से जुड़े सबूतों और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पद से अलग करना बेहद जरूरी है। मंत्री ने राजभवन का ध्यान इस बात की ओर भी दिलाया कि वित्त विभाग की ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद कुलपति के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन इस आदेश के जारी होने के महज 5 घंटे के भीतर ही यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार का तबादला कर दिया गया और उनकी जगह नए व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई। इस जल्दबाजी पर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

​जांच रिपोर्ट में सामने आई बड़ी वित्तीय अनियमितताएं

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा से जुड़े कामों के नाम पर लगभग 2.50 करोड़ रुपये का नियम विरुद्ध भुगतान किया गया है।
​ अक्टूबर 2025 में आयोजित तीसरे दीक्षांत समारोह के लिए करीब 79.35 लाख रुपये का बजट बना था, जिसे राजभवन से बिना वित्तीय स्वीकृति मिले ही खर्च कर दिया गया।

​डिजिटल बोर्ड फंड का गलत इस्तेमाल

साल 2021-22 में डिजिटल बोर्ड खरीदने के लिए आए 80 लाख रुपये पीएल खाते में रखे गए थे, जिन्हें नियमों को दरकिनार कर कुलपति के स्तर पर खर्च कर दिया गया। ​इसके अलावा, वित्त मंत्री ने कुलपति की शुरुआती नियुक्ति की वैधता और उन्हें बार-बार दिए गए कार्यकाल विस्तार पर भी सवाल उठाए हैं।

Read Also: JPSC धांधली मामले में पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता अभी जेल में ही रहेंगी, CID ने लगाए गंभीर आरोप

Related Articles

Leave a Comment