
रांची : झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को अदालत में मजबूती से नहीं रख रही है। इसके विरोध में मंच ने अब बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि 15 सितंबर को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई में सरकार ने छात्रों के हित में मजबूत पैरवी नहीं की, तो राज्य भर के युवा मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो और मंच के प्रतिनिधि राजेश प्रसाद ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि 5 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन जब सत्याग्रह में बदला, तब सरकार को दबाव में आकर 22 परीक्षाएं रद्द और कई स्थगित करनी पड़ी थीं। हालांकि, मामला हाई कोर्ट पहुंचते ही जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं के रद्दीकरण पर स्टे लग गया।
छात्र नेता राजेश प्रसाद के अनुसार, अभ्यर्थियों के आंदोलन का ही नतीजा था कि कई आरोपी पकड़े गए और CGL परीक्षा का मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना। युवाओं को भरोसा था कि सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर होगी। खुद सरकार ने भी छात्रों से विश्वास बनाए रखने की अपील की थी, जिसके बाद आंदोलन खत्म किया गया था। लेकिन जब मामला अदालत में पहुंचा, तो पहली ही सुनवाई में सरकार की तरफ से महाधिवक्ता हाजिर नहीं हुए।
उस दौरान सरकारी वकील ने अदालत से केवल जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा, जबकि सरकार चाहती तो सीआईडी जांच के ठोस सबूत और मजबूत तर्क कोर्ट के सामने रख सकती थी। यही ढिलाई CGL मामले में भी देखने को मिली।
छात्रों के साथ धोखा का आरोप
उन्होंने कहा कि अगर सरकार अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखती, तो रद्द की गई परीक्षाओं पर स्टे लगने की नौबत नहीं आती। भले ही सरकार की नीयत पर सीधे सवाल न उठाए जाएं, लेकिन सिर्फ विरोध दबाने के लिए फैसले लेना और कोर्ट में उनका बचाव न करना छात्रों के साथ सीधे तौर पर धोखा है। कार्मिक विभाग भी यह मान चुका है कि परीक्षाओं पर कार्रवाई सीआईडी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही की गई थी।
सभी जिलों में निकलेगी भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा
छात्रों का दावा है कि अदालत में महाधिवक्ता समय पर उपस्थित नहीं हुए और सीआईडी की जांच रिपोर्ट को प्रभावी ढंग से पेश ही नहीं किया गया। आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए मंच 24 अगस्त से भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा शुरू करने जा रहा है। यह यात्रा दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से शुरू होकर झारखंड के सभी 24 जिलों में जाएगी। इसका मकसद केवल विरोध जताना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक पारदर्शी और धांधली-मुक्त परीक्षा प्रणाली की गारंटी हासिल करना है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि 15 सितंबर को अगर सरकार का रुख सुस्त रहा, तो मुख्यमंत्री आवास के घेराव के साथ-साथ राज्य भर में अनिश्चितकालीन चक्का जाम जैसा बड़ा कदम उठाया जाएगा। इसके अलावा PGT समेत अन्य विवादित भर्तियों की निष्पक्ष जांच और संदिग्ध प्रक्रियाओं के तहत जारी प्रशिक्षण पर तुरंत रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है।
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