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JSSC CGL Scam : CID के रडार पर 100 से अधिक संदिग्ध अभ्यर्थी, मास्टरमाइंड की तलाश तेज

दो माह में 36 गिरफ्तारियां, परीक्षा एजेंसी के कर्मियों से रिमांड पर पूछताछ, एसआईटी पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने में जुटी

by Kanchan Kumar
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​रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा में हुई धांधली की कड़ियां खंगाल रही CID की विशेष जांच टीम एसआईटी के हाथ कई बड़े सुराग लगे हैं। गिरफ्तार बिचौलियों और एजेंटों से रिमांड पर हुई कड़ाई से पूछताछ के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का जाल परत-दर-परत खुलने लगा है। शुरुआती जांच के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि करीब 100 से ज्यादा ऐसे अभ्यर्थियों ने अनुचित तरीकों से परीक्षा पास की है, जो सीधे तौर पर इस सिंडिकेट के संपर्क में थे। इनमें से 10 फर्जी अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी पहले ही की जा चुकी है, जबकि अन्य संदिग्धों पर शिकंजा कसने के लिए दबिश दी जा रही है।

​एजेंसी के कर्मचारियों से दोबारा पूछताछ

​जांच का दायरा बढ़ाते हुए सीआईडी अब परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी ‘ICN’ के कर्ताधर्ताओं पर शिकंजा कस रही है। हाल ही में गिरफ्तार एजेंसी कर्मचारी सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को अदालत से रिमांड पर लेकर दोबारा गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इनके बयानों के आधार पर फरार चल रहे एजेंसी संचालक मिथिलेश सिंह का पता ठिकाना साफ हो सकेगा।

36 आरोपी सलाखों के पीछे

​परीक्षा फर्जीवाड़े की जांच शुरू होने के पिछले 60 दिनों के भीतर एसआईटी ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर कुल 36 आरोपियों को जेल भेजा है। हालांकि, इस पूरे मामले में जेएसएससी के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर फिलहाल सस्पेंस बरकरार है, क्योंकि आयोग से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

​यह पैटर्न जेपीएससी गड़बड़ी मामले की जांच से काफी अलग दिखता है। जेपीएससी मामले में जहां आयोग के पूर्व चेयरमैन, परीक्षा उप नियंत्रक और उच्च पदस्थ अफसरों तक गाज गिरी थी, वहीं सीजीएल मामले में अब तक की गाज सिर्फ एजेंटों, सेटरों और अभ्यर्थियों पर ही गिरी है।

​सिंडिकेट के सेटर और अनुचित लाभ लेने वाले अभ्यर्थी नपे

​पकड़े गए आरोपियों में अभ्यर्थियों को पैसों के दम पर पास कराने वाले बिहार और झारखंड के कई बड़े एजेंट शामिल हैं-जैसे छपरा का मनु कुमार सिंह, देवघर का सुधाकर यादव, पटना का राजन कुमार, कोडरमा का संदीप कुमार व राजेश प्रसाद।
​वहीं अवैध तरीके से ओएमआर शीट या पेपर सेटिंग का लाभ लेने के आरोप में टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी, उनकी पत्नी सुषमा कुमारी, फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार, कनीय सचिवालय सहायक के पद पर चयनित अजय कुमार, रामकृष्ण कुमार सिंह समेत एक दर्जन अभ्यर्थियों को जेल भेजा जा चुका है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में जांच पूरी होने पर कई और नाम बेनकाब होंगे।

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