पटना : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 6 जून को बिहार के नालंदा और गया जिलों में सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए आएंगे। यह उनका इस साल का बिहार में पांचवां दौरा है। इस दौरान वे विभिन्न सामाजिक वर्गों, खासकर दलित, पिछड़े और महिलाओं से संवाद करेंगे।
राहुल गांधी का कार्यक्रम विवरण
राहुल गांधी का बिहार दौरा 6 जून को सुबह 11.00 बजे दशरथ मांझी मेमोरियल ट्रस्ट के दौरे के साथ शुरू होगा। यहां वह माउंटेनमैन के रूप में प्रसिद्ध दशरथ मांझी के परिवार से मिलेंगे और उनकी संघर्ष की कहानी पर चर्चा करेंगे।
इसके बाद, दोपहर 12 बजे राहुल गांधी राजगीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में दलित एवं पिछड़ा वर्ग के प्रबुद्ध लोगों के साथ संविधान सुरक्षा सम्मेलन में संबोधित करेंगे।
महिला संवाद और अतिपिछड़ा संवाद
राहुल गांधी का अगला कार्यक्रम दोपहर 2.45 बजे गया के इम्पीरियल ड्रीम्स होटल में होगा, जहां वे माई-बहिन मान योजना पर महिला संवाद करेंगे। यहां वे महिलाओं के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे।
इसके बाद, राहुल गांधी शाम 4 बजे बोधगया के महाबोधि मंदिर का दर्शन करने जाएंगे और फिर राजगीर के लिए रवाना होंगे।
राजगीर में उनका कार्यक्रम ‘अतिपिछड़ा संवाद’ के रूप में आयोजित होगा, जिसमें वह अत्यंत पिछड़े वर्ग के नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। इस संवाद के दौरान, वे समाज के दबे-कुचले वर्ग के मुद्दों पर बात करेंगे और उनके अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देंगे। इसके बाद राहुल गांधी गया लौटेंगे और फिर दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।
राजनीतिक नहीं, सामाजिक उद्देश्य
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि राहुल गांधी का यह दौरा किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है। यह पूरी तरह से सामाजिक कार्यों और संवाद के लिए है। नालंदा में राहुल गांधी पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के साथ संवाद करेंगे, जबकि गया में वह महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
राहुल गांधी का बिहार दौरा : 2025 में पांचवां अवसर
राहुल गांधी का यह 2025 में बिहार का पांचवां दौरा है। इससे पहले वे 18 जनवरी, 5 फरवरी, 7 अप्रैल और 15 मई को बिहार आए थे। इन सभी दौरे में उन्होंने संविधान सुरक्षा सम्मेलन, ‘शिक्षा न्याय यात्रा’ और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। राहुल गांधी का बिहार में यह लगातार दौरा सामाजिक मुद्दों पर उनकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। उनका यह कदम राज्य में विभिन्न वर्गों के साथ संवाद की एक नई पहल हो सकती है, जो आगे चलकर राजनीति और समाज दोनों में परिवर्तन की दिशा तय करेगा।

