चाईबासा : सारंडा विकास समिति के बैनर तले शनिवार को 18 गांव के मुंडा-मानकी एवं ग्रामीणों ने सेल के रांजाबुरु माइंस को बंद कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सुबह से ही ग्रामीणों ने माइंस क्षेत्र में कामकाज ठप कर दिया, जिससे खनन कार्य और वाहनों का परिचालन पूरी तरह प्रभावित रहा।
समझौते का पालन न होने का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि पिछले 13 दिनों तक चले आंदोलन के बाद सेल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच जो समझौता हुआ था। उसका पालन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार समझौते में स्पष्ट तय हुआ था कि रांजाबुरु माइंस में ड्राइवर, खलासी, झंडा दिखाने वाले कर्मी समेत सभी मजदूरों की बहाली गुवा एवं आसपास के स्थानीय गांवों से की जाएगी।
बाहरी लोगों को रखने से नाराजगी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार मां सरला द्वारा बाहरी क्षेत्रों से मजदूरों को लाकर काम कराया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं में भारी नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से रोजगार की मांग कर रहे हैं और वार्ता के बावजूद स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलना समझौते का खुला उल्लंघन है।
प्रशासन ने की वार्ता, आंदोलन स्थगित
बड़ी संख्या में ग्रामीण माइंस परिसर के बाहर जुटे रहे और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग करते रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से वार्ता की। झारखंड के परिवहन मंत्री के पीए ने भी ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
काफी देर तक चली वार्ता के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। हालांकि ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और उग्र रूप में दोबारा शुरू किया जाएगा। क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर युवाओं और ग्रामीणों में लगातार आक्रोश बना हुआ है।

