नई दिल्ली : भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया दौरे के बाद, पाकिस्तान सरकार ने हिंदू मंदिरों के पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पंजाब प्रांत में एक हिंदू मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह जीर्णोद्धार 1960 से जर्जर पड़े बावली साहिब मंदिर के पहले चरण का कार्य शुरू करेगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ‘इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ (ETPB) ने नारोवाल शहर के जफरवाल नगर में इस मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की देखरेख करने वाली यह संघीय संस्था, अब हिंदू समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के लिए सक्रिय हो गई है।
बावली साहिब मंदिर का जर्जर होना हिंदू समुदाय के लिए एक बड़ा मुद्दा था, क्योंकि नारोवाल जिले में कोई अन्य हिंदू मंदिर नहीं है। इससे हिंदू समुदाय को धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए था। पाक धर्मस्थान समिति के अध्यक्ष सावन चंद ने कहा कि हिंदुओं को अन्य शहरों में मंदिर नहीं रहने से सियालकोट और लाहौर के मंदिरों का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि इस मंदिर के पुनर्निर्माण से उन्हें अपने धार्मिक अनुष्ठान करने की सुविधा मिलेगी।
पाकिस्तान के गठन के बाद नारोवाल जिले में 45 मंदिर थे, लेकिन समय पर मरम्मत न होने के कारण अधिकांश जर्जर हो गए। पिछले 20 वर्षों से पाक धर्मस्थान समिति बावली साहिब मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग कर रही थी। उच्चतम न्यायालय के ‘वन मैन कमीशन’ और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्यों ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय लगभग 75 लाख से अधिक है और यह सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। समुदाय के सदस्यों का मानना है कि वास्तव में यह संख्या 90 लाख से अधिक है। बावली साहिब मंदिर के पुनर्निर्माण से इस समुदाय की दीर्घकालिक मांगें पूरी होंगी और उन्हें अपने धार्मिक अनुष्ठान करने का स्थान मिलेगा।
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