
रांची: जब हौसलों में उड़ान हो और अपनी जड़ों पर गर्व हो, तो देश का सबसे बड़ा मंच भी छोटा लगने लगता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सिमडेगा की रहने वाली रेशमा लकड़ा ने। टीवी के बहुचर्चित क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 31वें एपिसोड में जब रेशमा ने मंच पर कदम रखा, तो उनकी बातों में सिमडेगा की माटी की खुशबू और गजब का आत्मविश्वास साफ़ छलक रहा था।
सब पर भारी पडूंगी… अंदाज ने जीता महानायक का दिल
शो के दौरान जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से रेशमा का सामना हुआ, तो उन्होंने बेहद बेबाक और दबंग अंदाज में अपना परिचय दिया-“सिमडेगा की मैं छोरी हूं, सब पर भारी पड़ूंगी!” उनकी इस एक लाइन ने न सिर्फ बिग बी के चेहरे पर मुस्कान ला दी, बल्कि स्टूडियो में बैठे दर्शकों का दिल भी जीत लिया।
प्रतिस्पर्धा के दौरान रेशमा का मुकाबला नोएडा के प्रशांत कुमार से हुआ। हालांकि हॉट सीट तक पहुँचने की रेस प्रशांत ने जीती, लेकिन रेशमा ने अपनी बेबाकी और दमदार उपस्थिति से पूरे देश में सिमडेगा का नाम रोशन कर दिया।
जब अमिताभ बच्चन ने पूछा- यह सिमडेगा कहां है?
बातचीत के दौरान जब अमिताभ बच्चन ने उत्सुकता से सिमडेगा के बारे में पूछा, तो रेशमा ने गर्व से अपनी जन्मभूमि की पहचान देश के सामने रखी। उन्होंने बताया कि सिमडेगा झारखंड का एक शांत, खूबसूरत और आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जिसे पूरे देश में ‘हॉकी की नर्सरी’ कहा जाता है।
इसी क्रम में उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार खिलाड़ी सलीमा टेटे का जिक्र करते हुए कहा कि वे और सलीमा एक ही गांव ‘बड़की छापर’ की बेटियां हैं। सलीमा टेटे का नाम आते ही पूरा केबीसी का मंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
लखनऊ के ऑडिशन से मुंबई के ग्लैमर तक
वर्तमान में सामाजिक वानिकी विभाग में प्रधान वनरक्षी के पद पर तैनात रेशमा की यह यात्रा आसान नहीं थी। फरसाबेड़ा के संत जोंस स्कूल से शुरुआती पढ़ाई और सिमडेगा कॉलेज से अंग्रेजी ऑनर्स करने वाली रेशमा का चयन केबीसी के कठिन पड़ावों से गुजरकर हुआ। लखनऊ ऑडिशन में 20 कठिन सवालों का सामना किया।
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उन्हें मुंबई से केबीसी में चुने जाने का फोन आया। 9 सितंबर को पति गौरव बेक के साथ मुंबई पहुंचीं और 10-12 सितंबर को शो की शूटिंग में हिस्सा लिया।
पूरे जिले में खुशी की लहर
भले ही रेशमा हॉट सीट तक पहुंचने से थोड़ी दूर रह गईं, लेकिन उन्होंने जिस तरह से राष्ट्रीय टीवी पर सिमडेगा की खेल संस्कृति और आदिवासी पहचान को पहचान दिलाई, उससे पूरे जिले में जश्न का माहौल है। लोगों का कहना है कि रेशमा ने यह साबित कर दिया कि झारखंड के छोटे से छोटे कस्बे की प्रतिभा भी बड़े से बड़े मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकती है।
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