
रांची: तीन दिनों से हो रही बारिश रांची के किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन आई है। थम-थमकर हो रही मूसलाधार बारिश ने खेतों को तालाब बना दिया है। नतीजा यह कि महीनों का पसीना, खाद, बीज और मेहनत… सब कुछ पानी में बहता नजर आ रहा है।
सबसे ज्यादा मार मकई और हरी सब्जियों की खेती पर पड़ी है। नीचले खेतों में घुटने भर पानी ठहर जाने से बैंगन, फूलगोभी, टमाटर और मिर्च के पौधे सड़ने लगे हैं। पानी की वजह से पौधों की जड़ें कमजोर पड़कर गल रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, मकई के पौधों पर कीड़ों ने हमला बोल दिया है, जिससे रही-सही कसर भी पूरी होती दिख रही है।
लागत निकल आए, तो बड़ी बात होगी
पिठोरिया इलाके के किसान राजू महतो, दिलीप महतो और नागेश्वर की आंखें अपने लहलहाते खेतों का यह हाल देखकर नम हैं। उनका कहना है कि इस बार फसल बहुत अच्छी दिख रही थी, जिससे उम्मीद थी कि परिवार की माली हालत थोड़ी सुधर जाएगी। लेकिन कुदरत के इस मिजाज ने सारी उम्मीदों पर फिरा दिया है।
किसानों की चिंता सिर्फ फसल टूटने की नहीं है, बल्कि कर्ज और लागत की भी है। खाद, कीटनाशक, बीज और मजदूरों की दिहाड़ी पर हजारों रुपये पहले ही लग चुके हैं। अब हालत यह है कि अगर बारिश जल्द न थमी, तो जेब से लगी मूल लागत भी वापस मिलना नामुमकिन हो जाएगा। कई ऐसे छोटे किसान हैं, जिनका पूरा घर-परिवार केवल सब्जियों की कमाई पर ही चलता है।
खेतों का नुकसान अब आपकी थाली तक पहुंचा
इस मौसमी मार की गूंज सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी सीधी चोट शहर के आम उपभोक्ताओं पर पड़ रही है। स्थानीय हाट-बाजारों में सब्जियों की आवक (सप्लाई) अचानक बहुत घट गई है। जो सब्जियां कुछ दिन पहले सामान्य दामों पर मिल रही थीं, वे अब 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी हैं। यानी एक तरफ खेत में किसान खून के आंसू रो रहा है, तो दूसरी तरफ मंडी में आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है।
आपदा राहत कोष से मिलेगा मुआवजा
रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता पहुंचाने की कवायद तेज कर दी है। उपायुक्त ने अपर समाहर्ता, सभी अंचल अधिकारियों और जिला कृषि अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे बिना देर किए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें और नुकसान का सटीक सर्वे तैयार करें। रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन बातें दर्ज होंगी- कितने एकड़ में लगी फसल बारिश की वजह से नष्ट हुई है, प्रभावित किसानों की कुल संख्या कितनी है एवं प्रत्येक परिवार और क्षेत्र को कुल कितना आर्थिक नुकसान पहुंचा है।
झारखंड सरकार के निर्देश पर तैयार की जा रही इस रिपोर्ट का मकसद कागजी कार्रवाई को जल्द पूरा कर पीड़ितों तक मदद पहुंचाना है। अंचल स्तर से मिलने वाले आंकड़ों को जोड़कर जिला स्तर पर एक फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे सीधे राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

