
रांची : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने पात्र नागरिकों से नहीं घबराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नोटिस जारी करना और दावा-आपत्तियों का निस्तारण मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी, ईआरओ-एईआरओ और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
के. रवि कुमार ने बताया कि 24 अगस्त से नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य श्रेणियों से जुड़े मतदाताओं के मामलों की सुनवाई शुरू होगी। संबंधित मतदाताओं को ईआरओ स्तर से नोटिस उपलब्ध कराया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पहले सात दिन का समय दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में दस्तावेज नहीं देने पर बीएलओ दोबारा संपर्क कर नोटिस देंगे और सात दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दावा-आपत्ति दाखिल करने की अवधि 5 अगस्त से 15 सितंबर तक है। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण 14 अक्टूबर तक किया जाएगा। इस दौरान नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची में दर्ज विवरण में जरूरी सुधार का काम भी जारी है।
दूसरे राज्य में नाम दर्ज मतदाताओं के लिए भी व्यवस्था
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि झारखंड के ऐसे मतदाता, जिनका नाम किसी दूसरे राज्य की मतदाता सूची में दर्ज है और वे झारखंड में अपना नाम स्थानांतरित कराना चाहते हैं, उनसे फॉर्म-8 और घोषणा पत्र लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। एक परिवार या घर के मतदाताओं को एक ही मतदान केंद्र की मतदाता सूची में दर्ज करने के लिए भी काम किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान प्राप्त आवेदनों और आंकड़ों में सामने आई त्रुटियों को नोटिस और सुनवाई के माध्यम से दूर किया जाएगा। दस्तावेजों के विधिसम्मत सत्यापन के बाद योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
विदेशी नागरिक के नाम पर आपत्ति दर्ज कराएं
के. रवि कुमार ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में पंजीकृत हो सकते हैं। यदि किसी राजनीतिक दल, बीएलए-2 या आम नागरिक को लगता है कि कोई विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल है या शामिल होने का प्रयास कर रहा है, तो फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। ईआरओ-एईआरओ स्तर पर दस्तावेजों की जांच के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विदेशी नागरिक को मतदाता सूची में शामिल कराने में सहयोग नहीं करना चाहिए। किसी विदेशी नागरिक को भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए आवेदन करना दंडनीय अपराध है। के. रवि कुमार ने सभी पात्र नागरिकों से एसआईआर में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने मतदाता विवरण की जांच करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि एसआईआर के बाद तैयार मतदाता सूची को स्थायी अभिलेख के रूप में संधारित किया जाएगा और उसमें दर्ज सही एवं प्रमाणित विवरण भविष्य में मतदाता तथा उसके परिवार के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उपयोगी होंगे। एसआईआर से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए निर्वाचन आयोग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क किया जा सकता है।


