Home » UPI पेमेंट पर फीस का झारखंड चैंबर ने किया विरोध, कहा- गैर-कानूनी लेनदेन और हवाला को मिल सकता है बढ़ावा

UPI पेमेंट पर फीस का झारखंड चैंबर ने किया विरोध, कहा- गैर-कानूनी लेनदेन और हवाला को मिल सकता है बढ़ावा

by Kanchan Kumar
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now
रांची: डिजिटल इंडिया के दौर में केंद्र सरकार द्वारा 2,000 रुपये से अधिक के ऑनलाइन यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने के नए फैसले का झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने पुरजोर विरोध किया है। कारोबारी संगठन का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ डिजिटल अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचेगी, बल्कि इससे गैर-कानूनी लेनदेन और हवाला कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
​

कारोबारियों ने जताई भारी नाराजगी

झारखंड चैंबर के अध्यक्ष तुलसी पटेल ने इस फैसले को व्यापारी हित के पूरी तरह खिलाफ बताया। उनका कहना है कि यूपीआई की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि लोग जेब में नगद पैसा लेकर चलने के जोखिम से बच सकें और आसानी से लेन-देन कर सकें। इस व्यवस्था ने लोगों को सुरक्षा और सहूलियत दोनों दी।

आसान बनाने के बजाय जटिल बना रही सरकार

​तुलसी पटेल का आरोप है कि सरकार इसे और आसान बनाने के बजाय जटिल बना रही है। जब लोग ऑनलाइन पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज देखेंगे, तो वे एक बार फिर कैश में लेनदेन करना शुरू कर देंगे। इससे बाजार में एक बार फिर नगदी का चलन बढ़ेगा और पारदर्शिता प्रभावित होगी।
​

क्या है नया शुल्क नियम?

​केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत यूपीआई लेनदेन के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है:
​2,000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन: पूरी तरह मुफ्त (कोई शुल्क नहीं)।
​2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन: 0.40% शुल्क के साथ 18% जीएसटी (GST) जोड़ा जाएगा। हालांकि, यह अधिकतम शुल्क 300 रुपये तक ही सीमित रहेगा।

​पारिवारिक लेनदेन: अगर आप अपने परिजनों या रिश्तेदारों को पैसे भेजते हैं, तो उस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
​विशेष छूट की श्रेणियां: स्कूल फीस और कुछ विशेष सेवाओं के लिए प्रति लेनदेन 5 रुपये का तय शुल्क रखा गया है।
​चैंबर का रुख: केंद्र सरकार को भेजा जाएगा विरोध पत्र।

​झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले पर खामोश नहीं बैठने वाला है। संगठन बहुत जल्द केंद्र सरकार को एक आधिकारिक पत्र लिखकर इस शुल्क को तुरंत वापस लेने की मांग करेगा। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में ढील देनी चाहिए, न कि नया वित्तीय बोझ डालना चाहिए।

Read Also: Chatra News : बीएसएफ जवान के बंद घर में करीब दस लाख की चोरी

Related Articles

Leave a Comment