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हिंदी दिवस: 14 सितंबर को क्यों मानते हैं ‘हिंदी दिवस’, क्या है 75 साल पुराना हिंदी का इतिहास

by Shyam Kishor Choubey
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हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है।

यह हमारे देश के लिए सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और एकता का प्रतीक भी है। हिंदी भाषा भारत की गलियों से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक बोली जाती है।

यह दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा है। दुनियाभर में लगभग 60 करोड़ लोग हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

हिंदी दिवस मनाने का क्या है उद्देश्य?

‘हिंदी दिवस’ को मनाने का उद्देश्य इसका विश्वभर में प्रचार-प्रसार करना है। इस दिन को मातृभाषा का महत्व समझने के लिए मनाया जाता है।

इस तारीख को हिंदी दिवस के प्रति समर्पित करने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा के अस्तित्व को बनाए रखना है।

साल में एक दिन यह बात लोगों के समक्ष रखना है कि जब तक वे हिन्दी का उपयोग पूर्ण रूप से नहीं करेंगे तब तक हिन्दी भाषा का विकास नहीं हो सकता है।

हिन्दी भाषा के विकास और विलुप्त होने से बचाने के लिए यह दिन देश में आवश्यक रूप से मनाया जाता है।

क्यों 14 सितंबर को ही मनाया जाता है ‘हिंदी दिवस’?

हिंदी भाषा को भारत की संविधान ने 14 सितंबर, 1949 को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया था।

इस दिन हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया, लिहाजा इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

महात्मा गांधी ने कहा था कि हिंदी जनमानस की भाषा है और उन्होंने इसे देश की राष्ट्रभाषा बनाने की सिफारिश भी की थी।

हिंदी: राजभाषा या राष्ट्रभाषा?

ज्यादातर लोग हिंदी को राष्ट्रभाषा समझते हैं, लेकिन हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी बहुत बहस और चर्चा हो चुकी है।

यह जान लीजिए कि हमारे भारत में किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिला है।

लंबी चर्चा के बाद इस बात पर सहमति बनी कि हिंदी को राजभाषा बनाया जाएगा, और आज की तारीख में हिंदी देश की राजभाषा है, वहीं अन्य भाषाओं को भी हर भारतीय उतनी ही इज्जत देता है।

राजभाषा और राष्ट्रभाषा के बीच अंतर

राष्ट्रभाषा वह है, जिसका इस्तेमाल राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है। वहीं, राजभाषा वह है जिसका उपयोग सरकारी कामकाज के लिए किया जाता है।

इसमें राष्ट्रीय अदालत, संसद या व्यावसायिक उद्देश्य आदि शामिल हैं।

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