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RANCHI SADAR HOSPITAL NEWS: सदर हॉस्पिटल में बिना पास के नहीं मिलेगी एंट्री, इतनी देर ही मरीज से मिल सकेंगे परिजन 

by Vivek Sharma
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VIVEK SHARMA 

रांची: रांची के सदर अस्पताल में मरीजों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी और परिसर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए हॉस्पिटल प्रबंधन ने सख्त कदम उठाए हैं। अब अस्पताल में मरीजों से मिलने आने वालों के लिए विजिटिंग ऑवर्स तय कर दिए गए हैं और बिना पास के किसी को भी अस्पताल में एंट्री नहीं मिलेगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को संक्रमण से बचाना, उन्हें पर्याप्त आराम देना और अस्पताल की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

केवल 2 घंटे ही होगी मुलाकात की अनुमति

प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर सदर अस्पताल में भी अब मरीजों से मिलने के लिए समय निर्धारित किया गया है। परिजन अब केवल दो घंटे तक ही मरीज से मुलाकात कर सकेंगे। विजिटिंग ऑवर्स के इस निर्णय से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी मरीजों के इलाज में आसानी होगी, साथ ही मरीजों को भी आराम मिल सकेगा। विजिटिंग आवर सुबह 1 घंटे और शाम को एक घंटे का होगा। 

एक मरीज के साथ सिर्फ एक अटेंडेंट

नए नियमों के तहत अस्पताल में अब एक मरीज के साथ केवल एक अटेंडेंट को ही रहने की अनुमति दी जाएगी। अभी तक देखा गया था कि एक मरीज के साथ 5 से 6 परिजन अस्पताल में रहते हैं, जिससे अस्पताल परिसर में भीड़ बढ़ जाती है। एक तो संक्रमण का खतरा भी रहता है। वहीं डॉक्टर व स्टाफ को भी परेशानी होती है। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि एक अटेंडेंट की मौजूदगी मरीज की देखभाल के लिए पर्याप्त है।

स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

इस नई व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने स्टाफ से लेकर सुपरवाइजर और होमगार्ड जवानों तक को विशेष ट्रेनिंग दी है। उन्हें यह सिखाया गया है कि कैसे आने-जाने वालों की पहचान की जाए, पास की जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर लोगों को समझाया जाए कि ये कदम मरीजों की भलाई के लिए उठाए जा रहे हैं।

इलाजरत मरीजों को मिलेगा लाभ

फिलहाल अस्पताल में सभी बेड फुल हैं और मरीजों के साथ भारी संख्या में परिजन अस्पताल में रह रहे हैं। इससे न केवल अस्पताल का लोड बढ़ गया है, बल्कि डॉक्टरों के राउंड के समय वार्ड में परिजनों की भीड़ लगी रहती है, जिससे इलाज में भी बाधा आती है। नए नियमों से यह भीड़ नियंत्रित होगी और डॉक्टर तथा नर्सों को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलेगी। यह कदम पूरी तरह से मरीजों के हित में उठाया गया है। इससे उन्हें संक्रमण से बचाया जा सकेगा, आराम मिलेगा और इलाज में भी तेजी आएगी। 

इस मामले में सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने बताया कि ये प्लानिंग लंबे समय से चल रही थी। इसके लिए काम हो चुका है। एक सेंट्रल गेट नहीं है। फिर भी हम इसे लागू करने जा रहे हैं। जिससे कि हॉस्पिटल की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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