गोरखपुर : एम्स में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। अब पूर्व सैनिकों की निगरानी में गोरखपुर एम्स की सुरक्षा होगी। सैनिक कल्याण निगम के लगभग 300 पूर्व सैनिकों ने सोमवार से प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। इन पूर्व सैनिकों को गोरखपुर एम्स की कार्यप्रणाली, मरीजों की देखभाल, तीमारदारों से व्यवहार और आपात स्थिति में कार्रवाई की तैयारी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 15 जून 2025 से ये पूर्व सैनिक पूरी तरह से गोरखपुर एम्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल लेंगे।
15 जून तक प्राइवेट कंपनी के हवाले थी सुरक्षा
गोरखपुर एम्स के उद्घाटन के बाद से अब तक सुरक्षा का जिम्मा एक प्राइवेट कोर कंपनी के पास था। बीते महीने इस कंपनी का टेंडर समाप्त हो गया। टेंडर खत्म होने के बाद प्राइवेट कंपनी के गार्डों ने प्रशासन के फैसले का विरोध किया और राजनीतिक नेताओं से भी मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। शुरू में कंपनी के 450 गार्डों को 30 जून तक कार्य करने की अनुमति दी गई, लेकिन अब इसे घटाकर 15 जून 2025 कर दिया गया है। इसके बाद गोरखपुर एम्स की सुरक्षा पूरी तरह पूर्व सैनिकों के हाथों में होगी।
पूर्व सैनिकों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
गोरखपुर एम्स के पहले दीक्षांत समारोह से पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्व सैनिकों को जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया। 9 से 15 जून 2025 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में पूर्व सैनिकों को निम्नलिखित पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जा रहा है:
- एम्स की कार्यप्रणाली: अस्पताल के दैनिक कार्यों और प्रक्रियाओं की जानकारी।
- मरीजों और तीमारदारों से व्यवहार: संवेदनशीलता और सहायता के साथ पेश आने का तरीका।
- छात्रावास सुरक्षा: छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- आपात स्थिति में कार्रवाई: संकट के समय त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की तैयारी।
यह प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा कि पूर्व सैनिक गोरखपुर एम्स में सुरक्षा, मरीजों की देखभाल और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हों।
गोरखपुर एम्स की कार्यकारी निदेशक विभा दत्ता ने कहा, “स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमें 300 पूर्व सैनिक आवंटित किए हैं। इन पूर्व सैनिकों को गोरखपुर एम्स की सुरक्षा की कमान सौंपने से पहले व्यापक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हम उन्हें एम्स की कार्यप्रणाली, मरीजों और तीमारदारों से व्यवहार, और आपात स्थिति में सहायता की जिम्मेदारी के बारे में प्रशिक्षित कर रहे हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रभावशीलता आएगी।”
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