- नगर विकास एवं आवास विभाग ने कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा प्रस्ताव
- विभागीय मंत्री, विधि व वित्त विभाग की ओर से पहले ही मिल चुकी है सहमति
- स्वीकृति मिलते ही राज्यभर में नियमितीकरण की नई प्रक्रिया की हो जाएगी शुरुआत
- लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर तीसरी बार लाया जा रहा छूट का प्रावधान
- सात साल पहले सिर्फ आवासीय भवनों के के लिए नोटिफाई की गई थी विशेष योजना
- जटिल प्रक्रिया और अधिक शुल्क दरों के कारण आम लोगों ने कम दिखाई थी रुचि
Ranchi : हेमंत सरकार ने शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हुए अवैध और अनधिकृत निर्माण को कानूनी दायरे में लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों के नियमितीकरण नियम- 2026 का प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया है। इसमें खास बात यह कि अब राज्यभर में आवासीय भवनों के साथ-साथ गैर-आवासीय भवन भी नियमितीकरण के दायरे में आएंगे। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलते ही राज्यभर में अवैध भवनों के नियमितीकरण की नई प्रक्रिया शुरू होगी। अवैध निर्माण के साथ स्वीकृत भवन प्लान में अतिरिक्त विचलन किए हुए मकान का नियमितीकरण करने की प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि नगर विकास विभाग के इस प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री, विधि विभाग और वित्त विभाग की पहले ही सहमति मिल चुकी है। विभागीय प्रस्ताव के अनुसार, भवन निर्माण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से पूर्व में झारखंड नगरपालिका अधिनियम- 2011 की धारा 434 के तहत वर्ष 2016 में भवन उपविधि अधिसूचित की गई थी। इसके बावजूद रांची सहित अन्य शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बिना अनुमति निर्माण हो चुके हैं। इससे नागरिक सुविधाओं, यातायात, जल निकासी और नगर नियोजन व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी 2019 की योजना
बता दें कि वर्ष 2019 में केवल आवासीय भवनों के नियमितीकरण के लिए विशेष योजना अधिसूचित की गई थी, लेकिन जटिल प्रक्रिया और अधिक शुल्क दरों के कारण आम लोगों ने सीमित रुचि दिखाई। ऐसे में यह आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि फिर तीसरी बार अनधिकृत निर्माण को संरचनात्मक स्थिरता, नियोजन मापदंड के दायरे में रखकर नियमितीकरण की कार्रवाई की जाए। राज्य सरकार के निर्देश पर अन्य राज्यों विशेष कर तेलंगाना में वर्ष 2015 में गठित नियमितीकरण नियमावली की तर्ज पर झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ
अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स 2026 का प्रारूप तैयार किया गया है।
पूर्व में बहुत कम मामलों का हुआ निष्पादन
रांची नगर निगम में 208 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 190 निष्पादित और 18 अस्वीकृत हुए। रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण में 25 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 10 निष्पादित और 15 अस्वीकृत हुए। पूर्व नियमावली में अनुमन्य फ्लोर एरिया अनुपात (एफएआर) तक 200 रुपये प्रति वर्गमीटर तथा उससे अधिक निर्मित क्षेत्र पर 500 रुपये प्रति वर्गमीटर शुल्क निर्धारित था, जिसे विभाग ने अधिक माना है।
नए नियमों की प्रमुख विशेषताएं
आवासीय के साथ गैर-आवासीय भवनों का भी नियमितीकरण।
शुल्क दरों को युक्तिसंगत एवं व्यावहारिक बनाना।
नियमितीकरण शुल्क की राशि किस्तों में जमा करने की सुविधा।
आवेदन अस्वीकृत होने की स्थिति में जमा राशि वापस करने का प्रावधान।
लाइसेंसधारी तकनीकी व्यक्ति (एलटीपी) के परामर्श शुल्क की अधिकतम सीमा निर्धारित करना।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन
नियमावली के तहत आवेदन अधिसूचना की तिथि से 60 दिनों के भीतर केवल ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे। आवेदन, शुल्क भुगतान, दस्तावेजों की जांच (स्क्रूटनी) एवं स्वीकृति की संपूर्ण प्रक्रिया बिल्डिंग प्लान अप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम (बीपीएएमएस) पोर्टल के माध्यम से होगी।
शुल्क का 50 प्रतिशत करना होगा जमा
आवेदन के साथ बिल्डिंड का फोटो, स्वीकृति प्लान, स्वीकृत प्लान के साथ-साथ विचलन किया हुआ एरिया का दो सेट ड्राइंग कॉपी देना होगा। कुल नियमितीकरण शुल्क का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य होगा। किसी भी स्थिति में कुल राशि 10 हजार रुपये से कम नहीं होगी। जिन भवनों का निर्माण संबंधित नगर निकाय के गठन या पुनर्गठन से पूर्व हुआ है, उनके लिए एकमुश्त 5,000 रुपये नियमितीकरण शुल्क देय होगा।
नियमितीकरण की सीमा तय
अधिकतम 10 मीटर ऊंचाई या भूतल प्लस दो मंजिल (जी+2) तक के भवन।
अधिकतम 300 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित भवन।
यदि अग्निशमन विभाग, पर्यावरण प्राधिकरण, एयरपोर्ट अथॉरिटी या अन्य सक्षम विभाग से पूर्व स्वीकृति आवश्यक है, तो संबंधित नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) अनिवार्य होगा।
जनहित और शहरी नियोजन पर फोकस
विभाग का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या, जमीन और मकान किराए में तेज वृद्धि तथा कमजोर आय वर्ग के लोगों की आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह पहल की जा रही है। सरकार का उद्देश्य अनधिकृत एवं मलिन बस्तियों में रहने वाले परिवारों को राहत देना और शहरी नियोजन को सुव्यवस्थित बनाना है। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद जल्द से जल्द नए नियम अधिसूचित कर दिए जाएंगे।
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