घाटशिला : सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विवेकानन्द ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में पद्मश्री छुटनी महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई। छुटनी महतो ने सभागार में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने अशिक्षित होते हुए भी डायन जैसी अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया है। बताया कि इन्हें घर परिवार के लोगों ने घर से निकाल दिया लेकिन वे इन बातों को पीछे छोड़कर पीड़ित महिलाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं और उन्हें आश्रय प्रदान कर रही हैं।
कोई भी पीड़ित महिला इनसे संपर्क करके सहायता प्राप्त कर सकती है। छुटनी अभी भी थानों में जाकर वहां डायन बिसाही संबंधी दर्ज मामलों की जानकारी लेती हैं।
सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सोना देवी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न कोर्सेज की जानकारी दी और सीएसआर के कार्यों से अवगत कराया। सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने सभी आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामना दी।
साथ ही कहा कि आजादी के लगभग 75 वर्ष बाद भी समाज में महिलाओं का स्थान वैसा नहीं रहा जैसा पहले था। जिस देश में महिलाओं को पूजा गया उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा। प्रभाकर सिंह ने पद्मश्री छुटनी महतो का आभार प्रकट करते हुए कहा कि सामाजिक बुराईयों तथा शोषण को दूर कराने के संधर्ष में सभी को पद्मश्री छुटनी महतो का साथ गंभीरता से देना होगा।
विशिष्ट वक्ता के रूप में अधिवक्ता ममता सिंह ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी महिलाओं को उनसे संबंधित कानून की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने लैगिक समानता, समान कार्य, समान वेतन तथा कार्य स्थल पर महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों की भी जानकारी दी। ममता सिंह ने संविधान प्रदत्त अधिकारों की चर्चा करते हुए बाल विवाह निषेध अधिनियम, दहेज प्रताड़ना अधिनियम, धरेलु हिंसा अधिनियम तथा पॉस्को एक्ट के बारे में भी बताया।
साथ ही उन्होंने महिलाओं को उनकी जिम्मेदारी की याद भी दिलाई। इन्होंने महिलाओं की शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि सिर्फ डिग्री हासिल करने का मकसद नहीं होना चाहिए। कोल्हान विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ रागिनी भूषण ने सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में महिला दिवस मनाने की आवश्यकता क्यों है। इन्होंने भगवान शिव के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप की चर्चा करते हुए पंचतत्व के बारे में बताया। गिव टू गेन का अर्थ बताते हुए कहा कि वेदों में महिलाओं को पुरूषों से उच्च स्थान प्राप्त था।
इन्होंने गृहस्थी तथा स्वयंवर का अर्थ भी बताया। डॉ रागिनी ने वेदों और पुराणों के संदर्भ साझा करते हुए कहा कि हर तरह से सशक्त होते हुए भी महिलाओं के लिए महिला दिवस मनाने की आवश्यता क्यों पड़ी। इसका जवाब देते हुए स्वयं डॉ रागिनी ने कहा कि बदलते परिवेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ प्रबंध किए गए। ऐतिहासिक काल में कुछ कुरीतियां आईं और इसका खामियाजा सभी महिलाओं को भुगतना पड़ा। महिलाओं को महिला विमर्श के बजाय अब आत्म विमर्श करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को परिस्थितियों को संभालने की सीख दी तथा सभी महिलाओं तथा छात्राओं को संबोधित ‘राष्ट्र की ऋचाओं को गुनगुनाना चाहिए’ शीर्षक से एक ऋचा प्रस्तुत कर महिला दिवस की शुभमामनाएं दी।
सोना देवी विश्वविद्यालय की ट्रस्टी तथा कोल्हान विश्वविद्यालय की बॉटनी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ निर्मला शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि उन महिलाओं को भी बधाई जिन्होंने अपने हक की लड़ाई लड़ी। कुलसचिव डॉ नित नयना ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा संगीत विभाग की अध्यक्ष डॉ संगीता चौधरी के साथ सामूहिक राष्ट्रगान के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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