चक्रधरपुर: दक्षिण पूर्व रेलवे चक्रधरपुर रेल मंडल के राउरकेला रेलवे स्टेशन पर दिनदहाड़े हुई आत्महत्या की इस हृदय विदारक घटना ने न सिर्फ लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि रेलवे प्रशासन की लचर व्यवस्था और संवेदनहीनता को भी बेनकाब कर दिया है। राउरकेला स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर एक युवक ने खुलेआम फांसी लगाकर अपनी जान दे दी और करीब 15 से 20 मिनट तक यह पूरा घटनाक्रम चलता रहा, लेकिन हैरानी की बात है कि न तो किसी सुरक्षाकर्मी की नजर उस पर पड़ी और न ही उसे बचाने की कोई कोशिश की गई।
आरपीएफ और जीआरपी पर उठे गंभीर सवाल
भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर इस तरह की घटना यह साबित करती है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है और जमीनी स्तर पर पूरी तरह फेल हो चुकी है। घटना के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिस स्टेशन पर हर समय सुरक्षा का दावा किया जाता है, वहां एक युवक खुलेआम अपनी जान दे देता है और सिस्टम को भनक तक नहीं लगती। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। घटना के बाद सुरक्षाबल मौके पर पहुंचे, शव को नीचे उतारा गया और जांच शुरू कर दी गई, लेकिन सवाल यह है कि जब युवक जिंदा था, तब सिस्टम कहां था?
मामले की जांच शुरू
मामले में चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राज्य पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच रेलवे सुरक्षा बल तथा सरकारी रेलवे पुलिस द्वारा की जा रही है। हालांकि यह आधिकारिक बयान केवल औपचारिकता भर नजर आता है, क्योंकि जिस तरह दिनदहाड़े एक युवक की जान चली गई, वह सीधे-सीधे सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने लगाए आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चक्रधरपुर रेल मंडल के इस महत्वपूर्ण स्टेशन पर पहले भी कई आपराधिक गतिविधियां सामने आती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। यहां टिकट दलाली, गांजा तस्करी, प्रतिबंधित गोमांस की बिक्री, अवैध शराब बिक्री, चोरी, मारपीट जैसी गतिविधियों के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के बाद कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन वह अक्सर दिखावटी साबित होती है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रेलवे प्रशासन अब भी सबक लेने को तैयार नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार जिम्मेदारी तय होगी और व्यवस्था में सुधार आएगा, या फिर यह दर्दनाक घटना भी कागजी कार्रवाई तक सिमट कर रह जाएगी।
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