पलामू । झारखंड के पलामू जिले में स्थित पलामू टाइगर रिजर्व Palamu Tiger Reserve के कोर एरिया से गुजरने वाली रेलवे लाइन को अब डायवर्ट करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
यह रेल लाइन लंबे समय से बाघ और हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर के बीच से गुजरती रही है, जिससे वन्यजीवों को खतरा बना रहता था। अब इस लाइन को कोर एरिया से हटाकर बाहरी हिस्से से ले जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
दरअसल, सोननगर से पतरातू तक रेलवे द्वारा तीसरी रेल लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत कई हिस्सों में काम पूरा हो चुका है, लेकिन पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में काम अटका हुआ था। वर्ष 2021 में रेलवे विकास निगम ने इस क्षेत्र में तीसरी लाइन बिछाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मांगा था, जिसे टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने खारिज कर दिया। इसके बाद मामला राज्य वन्यजीव बोर्ड और फिर राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड तक पहुंचा, जहां तीसरी लाइन की अनुमति नहीं दी गई।
छिपादोहर-हेहेगड़ा के बीच बदलेगा ट्रैक
रेल लाइन का डायवर्जन लातेहार जिले के छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशनों के बीच किया जाएगा। वर्तमान में यह दूरी लगभग 11 किलोमीटर है, लेकिन डायवर्ट होने के बाद यह बढ़कर करीब 14 किलोमीटर हो जाएगी। नई लाइन केड गांव होते हुए गुजरेगी और टाइगर रिजर्व के बाहरी क्षेत्र से होकर निकलेगी। हालांकि, कुछ हिस्सा अब भी रिजर्व क्षेत्र से जुड़ेगा, जहां वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे।
टनल निर्माण से सुरक्षित रहेगा कॉरिडोर
डायवर्जन योजना के तहत रेलवे लाइन के एक हिस्से में टनल बनाने की भी योजना है। इसका उद्देश्य यह है कि बाघ और हाथियों के आवागमन में कोई बाधा न आए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके आवास को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा।
रेल लाइन डायवर्ट करने को लेकर पलामू टाइगर रिजर्व और रेलवे विकास निगम द्वारा सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें जिला प्रशासन भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों से भी सुझाव और आपत्तियां ली जा रही हैं, ताकि परियोजना को संतुलित तरीके से लागू किया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह रेल लाइन बाघ और हाथियों के प्रमुख कॉरिडोर से गुजरती है, जहां कई बार वन्यजीव ट्रेन हादसों का शिकार हो चुके हैं। इसी वजह से इस रूट पर ट्रेनों की अधिकतम गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि रेल लाइन का डायवर्जन इन जानवरों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करेगा और उनके आवागमन को सुगम बनाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी जुड़ी
पलामू क्षेत्र में पहली रेलवे लाइन 1903-04 में बिछाई गई थी, जबकि 1906 में इस क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण किया गया था। बाद में 1974-75 में इसका दोहरीकरण किया गया। 1973 में पलामू टाइगर रिजर्व की स्थापना हुई और इसके बाद से इस क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दी जाने लगी।
वर्ष 2018-19 में तीसरी लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ, लेकिन अब इसे पर्यावरण के अनुरूप संशोधित किया जा रहा है। कुल मिलाकर, रेल लाइन का यह डायवर्जन वन्यजीव संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

