RANCHI: रांची के डोरंडा स्थित पुराने झारखंड हाईकोर्ट के पास अंबेडकर जयंती के अवसर पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए नेताओं और जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा लगा रहा। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बाबा साहेब को नमन कर उनके योगदान को याद किया। राज्यपाल ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर न केवल भारतीय संविधान के शिल्पकार थे, बल्कि संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने देश को ऐसा संविधान प्रदान किया, जो लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि उनके इस महान योगदान के कारण हमें विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र का नागरिक कहलाने का गौरव प्राप्त है।
राज्यपाल ने कहा कि बाबासाहेब ने देश को एक सशक्त, समावेशी एवं न्यायपूर्ण दिशा प्रदान की। उनके द्वारा निर्मित संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, स्वतंत्रता एवं गरिमा के साथ जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, संकल्प और आत्मविश्वास का प्रेरणादायी उदाहरण है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने उच्चतम शिक्षा प्राप्त कर समाज में व्याप्त भेदभाव एवं असमानता के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया। उनका दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा समाज में परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। राज्यपाल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके विचारों और आदर्शों को केवल स्मरण ही न करें, बल्कि उन्हें अपने आचरण में भी आत्मसात करें। एक समरस और सशक्त समाज के निर्माण में सबकी सक्रिय भागीदारी ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती का यह शुभ दिन भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश के लिए गौरव का क्षण है। देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था में डॉ भीमराव अंबेडकर का योगदान अविस्मरणीय है। इनके द्वारा की गई संविधान की संरचना को पूरा देश सलाम करता है। उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर ने एक महान समाज सुधारक के रूप में गरीब, पिछड़े, शोषित, वंचित सहित सभी वर्ग-समुदाय के कल्याण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। हम सभी को उनके जीवन मूल्यों एवं आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

