रांची : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने घुसपैठ के मुद्दे पर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला है। कहा कि झारखंड घुसपैठियों का सेफ जोन बनता जा रहा है। उन्होंने सीमावर्ती जिलों में सत्यापन अभियान चलाने की मांग की है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की लापरवाही और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण झारखंड घुसपैठियों के लिए सुरक्षित जगह बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के पाकुड़, साहिबगंज, दुमका और जामताड़ा जैसे सीमावर्ती जिले लंबे समय से घुसपैठ की समस्या से प्रभावित हैं। पश्चिम बंगाल में सख्ती बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में लोग झारखंड की ओर आ सकते हैं। ऐसे में राज्य सरकार को पहले से सतर्क रहने की जरूरत है।
वे बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में को संबोधित कर रहे थे। कहा कि केंद्र सरकार देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश प्रकाश प्रभात नवेलकर कर रहे हैं।
सीमावर्ती जिलों में विशेष सत्यापन अभियान चलाने की जरूरत
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठा रही है। भाजपा नेता ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाए और संदिग्ध लोगों की पहचान की जाए। साथ ही डिटेंशन सेंटर बनाकर अवैध रूप से रहने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाए।
प्रतुल शाहदेव ने दावा किया कि संथाल परगना क्षेत्र में जनसंख्या के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि राज्य की सामाजिक व्यवस्था, स्थानीय संसाधनों, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लगातार उठाती रहेगी और घुसपैठ के खिलाफ आवाज बुलंद करती रहेगी।
उन्होंने दावा किया कि 1951 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों की तुलना से संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी आबादी में 16 प्रतिशत की कमी और मुस्लिम आबादी में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बदलाव गंभीर चिंता का विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन हेमंत सरकार के “ढुलमुल रवैये” और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने का संदेश जा रहा है।

