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Chaibasa News : बाबूलाल मरांडी का बंदगांव और चक्रधरपुर में भव्य स्वागत, राज्य सरकार पर बोला तीखा हमला

पुलिस के सामने हत्या, जिले में फैक्ट्री बंद, लोग बेरोजगार, बालू का टेंडर ना होना सरकार की नाकामी : मरांडी

by Rajeshwar Pandey
Babulal Marandi Chaibasa Visit
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चाईबासा : झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी अपने तीन दिवसीय दौरे पर पश्चिमी सिंहभूम जिला पहुंचे। सोमवार को बंदगांव और चक्रधरपुर आगमन पर भाजपा कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने उनका जोरदार अभिनंदन किया।
बंदगांव में भाजपा नेता अनूप सिंह की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने फूल-माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद चक्रधरपुर के आसानतलिया पहुंचने पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, भाजपा जिला अध्यक्ष व पूर्व विधायक गुरुचरण नायक, विधायक शशि भूषण सामड, विजय गागराई और मालती गिलुवा समेत भारी संख्या में पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया।

संगठन की मजबूती और जनसमस्याएं सुनना मुख्य उद्देश्य

स्वागत समारोह के बाद बाबूलाल मरांडी ने कार्यकर्ताओं और आम जनता से सीधा संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तीन दिवसीय दौरे का मुख्य लक्ष्य जमीनी हकीकत को परखना, आम जनता की तकलीफों से रूबरू होना और संगठन को बूथ स्तर पर और अधिक सशक्त बनाना है।

सारंडा के विकास और रोजगार पर सरकार को घेरा

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सारंडा क्षेत्र में खदानों के बंद होने से हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, अवैध रूप से खनन कर लौह अयस्क को फैक्ट्रियों तक भेजा जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं का रोजगार छिन रहा है। मरांडी ने कहा कि सारंडा में देश का एक प्रमुख पर्यटन और औद्योगिक केंद्र बनने की पूरी क्षमता है, लेकिन लौह अयस्क जैसे बहुमूल्य खनिज से समृद्ध होने के बाद भी यहां के मूल निवासियों की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है।

DMFT फंड के दुरुपयोग का आरोप

बाबूलाल मरांडी ने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद सारंडा के विकास के लिए डीएमएफटी (DMFT) फंड की शुरुआत की गई थी। इसके तहत दिसंबर 2025 तक जिले को लगभग 37 सो करोड़ रुपये मिले हैं और हर साल करीब 300 सो करोड़ रुपये का आवंटन होता है। इस राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुधारने में होना चाहिए था, लेकिन धरातल पर कोई विकास कार्य नहीं दिख रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह फंड अब पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

स्थानीय मुद्दों और कानून-व्यवस्था पर जताई चिंता

उन्होंने कराईकेला का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आज भी लोग नल-जल योजना के लाभ से वंचित हैं। वहीं चिड़िया के दुबिल माइंस में रोजगार की मांग को लेकर पिछले 16 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे युवाओं को प्रशासन ने बलपूर्वक हटा दिया, जो कि निंदनीय है। राज्य की चरमराती कानून-व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जमशेदपुर जैसे शहरों में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद खुलेआम हत्याएं हो रही हैं। बालू घाटों की नीलामी न होने के कारण बालू की भारी कालाबाजारी हो रही है। एक ट्रैक्टर बालू 14 से 15 हजार रुपये में बिक रहा है, जिसके चलते प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी अपने मकान नहीं बना पा रहे हैं। कई इलाकों में तो समय पर राशि न मिलने के कारण गरीबों के आशियाने अधूरे लटके हुए हैं।

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