हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग जिले स्थित एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की चट्टी बरियातु कोल परियोजना लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही है। कोयला उत्पादन के क्षेत्र में रिकॉर्ड प्रदर्शन करने के साथ-साथ यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका संवर्धन जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय योगदान दे रही है। यही कारण है कि चट्टी बरियातु परियोजना अब केवल एक खनन परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास के एक सफल मॉडल के रूप में उभर रही है।
मई 2026 में परियोजना ने निर्धारित मासिक लक्ष्य का 100 प्रतिशत हासिल करते हुए 5.65 लाख मीट्रिक टन से अधिक कोयला उत्पादन दर्ज किया। वहीं 5.57 लाख मीट्रिक टन कोयले का रिकॉर्ड डिस्पैच कर परियोजना ने संचालन क्षमता का नया मानक स्थापित किया है।
वित्तीय वर्ष में उत्पादन और डिस्पैच ने बनाया नया रिकॉर्ड
चालू वित्तीय वर्ष में अब तक चट्टी बरियातु कोल परियोजना का संचयी कोयला उत्पादन 14.43 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। वहीं कुल डिस्पैच 14.23 मिलियन टन दर्ज किया गया है। उत्पादन और आपूर्ति के इन आंकड़ों ने परियोजना को देश की प्रमुख कोयला खनन इकाइयों में शामिल कर दिया है।
परियोजना के लिए एक और बड़ी उपलब्धि इसकी अत्याधुनिक कोयला विश्लेषण प्रयोगशाला को हाल ही में मिली एनएबीएल (NABL) मान्यता है। इससे गुणवत्ता परीक्षण और संचालन प्रक्रियाओं को और मजबूती मिली है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित पेयजल आपूर्ति
कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत परियोजना द्वारा आसपास के गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पेयजल संकट को दूर करने के लिए चार पंचायतों के आठ गांवों में 11 जल टैंकरों के माध्यम से नियमित जलापूर्ति की जा रही है। इसके अलावा नौ बोरवेल और ओवरहेड टैंकों का निर्माण कराया गया है। ग्रामीण सड़कों और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास पर भी लगातार कार्य किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया आधार
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी परियोजना की भूमिका उल्लेखनीय रही है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 200 पोषण किट वितरित की गईं। बिरहोर टांडा और बिरहोर कॉलोनी में स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन कर ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इन शिविरों में एक्स-रे और रक्त जांच जैसी सेवाएं भी प्रदान की गईं। इसके साथ ही 200 मच्छरदानियों का वितरण किया गया तथा 200 से अधिक छात्राओं के लिए स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
आजीविका संवर्धन कार्यक्रमों के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। मधुमक्खी पालन, सिलाई और ब्यूटीशियन प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया। परियोजना द्वारा 33 सिलाई मशीनों का वितरण भी किया गया, जिससे कई महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।
शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी उल्लेखनीय योगदान
शिक्षा क्षेत्र में चट्टी बरियातु परियोजना ने 1,200 से अधिक विद्यार्थियों को स्कूल बैग और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई। इसके अलावा 560 सोलर लैम्प और सोलर पैनल वितरित कर छात्रों की पढ़ाई को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 2,000 फलदार पौधों का वितरण किया गया। स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान वृक्षारोपण अभियान, सफाई अभियान और डस्टबिन वितरण जैसे कार्यक्रम भी संचालित किए गए।
विकास और पर्यावरण के संतुलन का उदाहरण बनी परियोजना
परियोजना प्रबंधन का कहना है कि चट्टी बरियातु कोल परियोजना केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन को भी समान प्राथमिकता देती है। उत्पादन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों ने इस परियोजना को झारखंड में समावेशी विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना दिया है।

