Home » Jamshedpur News : 19 वर्ष बाद कोर्ट ने दिया आदेश, ज्वेलर्स पर चलेगा हत्या का मुकदमा

Jamshedpur News : 19 वर्ष बाद कोर्ट ने दिया आदेश, ज्वेलर्स पर चलेगा हत्या का मुकदमा

Jamshedpur News : बकाया पैसा मांगने पर सोनार अजय बर्मन की मालिक व उसके कर्मचारियों ने पीट-पीट कर मार डाला था

by Birendra Ojha
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

जमशेदपुर : 19 वर्षों के बाद अदालत ने साबित किया कि अजय बर्मन की टीएम ज्वेलर्स के मालिक मिलन आडेसरा, उसके भतीजे संदीप आडेसरा, उनके स्टाफ और भाड़े के गुंडों ने मिलकर हत्या की थी। जुडिशियल मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार की अदालत ने मिलन आडेसरा और अन्य के खिलाफ 20 सितंबर 2025 को संज्ञान लिया और हत्या के अभियुक्तों को 18 अक्टूबर 2025 को अदालत में हाजिर होने को कहा था।

ज्ञात हो कि 24 वर्षीय अजय बर्मन पेशे से सोनार था और अपने चाचा के साथ छगनलाल ज्वेलर्स, बिष्टुपुर में लगभग 10 वर्षों तक सोने की कारीगरी सीखने के बाद अपने घर पर ही सोने और चांदी के गहने बनाने का काम शुरू किया। घटना के दिन 11 मई 2007 को अपना बकाया पैसा लेने के लिए टीएम ज्वेलर्स की दूसरी शाखा में गया था, जो गोलमुरी, आकाशदीप प्लाजा में है। परिवार वालों और उसके साथ गए एक साथी के अनुसार, अजय बर्मन लगभग एक घंटे तक अपने बकाए पैसे लेने के लिए उस दुकान में बैठा रहा और फिर जब दुकान से ग्राहक चले गए, तब मिलन आडेसरा, संदीप आडेसरा, दुकान के स्टाफ और कुछ भाड़े के बुलाए गए गुंडों ने सीसीटीवी बंद कर अजय बर्मन को मारना शुरू कर दिया। इनमें से एक ने स्टील का स्टूल उठाकर उसके सिर के नीचे कनपटी के पास मारा, जिससे वह नीचे गिर गया, उसके बाद मिलन आडेसरा, संदीप आडेसरा, दुकान के स्टाफ और गुंडे अजय बर्मन को घसीटते हुए पार्किंग की जगह ले गए। मिलन आडेसरा ने सिदगोड़ा के तत्कालीन थाना प्रभारी सकलदेव राम को फोन पर सूचना देकर घटनास्थल पर बुलाया और अजय बर्मन की लाश को सकलदेव राम और अन्य थानाध्यक्षों और पुलिस वालों को सौंप दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस के आने के पहले ही अजय बर्मन की मौत हो चुकी थी।

तत्कालीन थाना प्रभारी सकलदेव राम पर भी उठे सवाल

इस घटना में दो एफआईआर दर्ज हुआ – एक मिलन आडेसरा द्वारा 73/2007 और पुलिस द्वारा 74/2007। दोनों एफआईआर एक-दूसरे की छाया प्रति थी और आरोप है कि सिदगोड़ा थाना के तत्कालीन थानाप्रभारी सकलदेव राम ने अजय बर्मन के परिवार वालों के एफआईआर को गायब कर दिया था।

पुलिस और मिलन आडेसरा दोनों के एफआईआर में यह दावा किया गया था कि अजय बर्मन, रिजवान के नाम से एक बम और एक रिवाल्वर के साथ टीएम ज्वेलर्स में रंगदारी वसूलने अकेले गया था! जब उसने रंगदारी मांगी तब दुकान में मौजूद लोगों ने नाराज हो कर उसे पकड़ लिया और मारपीट करने लगे, उसे पार्किंग स्थल पर ले गए, जहां शोर शराबा सूनकर 250-300 लोग जमा हो गए और उनलोगों ने अजय बर्मन को पीट-पीट कर मार डाला!

पीयूसीएल से मृतक के परिवार ने लगाई थी गुहार

अजय बर्मन के परिवार वालों ने इस घटना की जांच करने के लिए लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) से आग्रह किया! पीयूसीएल ने अपनी जांच में पाया कि अजय बर्मन अपना बकाया मांगने गया था, जहां मिलन आडेसरा, संदीप आडेसरा, दुकान के स्टाफ और भाड़े के बुलाए गुंडों ने उसे सीसीटीवी बंद कर दुकान के भीतर ही मारपीट कर अधमरा कर दिया, जिससे उसकी पार्किंग स्थल तक लाते-लाते मौत हो गई! पीयूसीएल की जांच में यह भी पता चला कि वहां 250-300 लोगों की कोई भीड़ जमा नहीं हुई थी और उसे किसी भीड़ ने नहीं मारा! पीयूसीएल ने यह भी खुलासा किया था कि अजय बर्मन को टी एम ज्वेलर्स वाले पहले से जानते थे क्योंकि उसने छगन लाल ज्वेलर्स, बिस्टुपुर में कारीगरी सीखी थी जिसके ठीक बगल में बिस्टुपुर की मुख्य सड़क की दूसरी तरफ टी एम ज्वेलर्स की दुकान है! यह खुलासा भी हुआ कि अजय बर्मन काफी दिनों से टी एम ज्वेलर्स का माल बना रहा था!

पीयूसीएल ने अपनी रपट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी और मानवाधिकार आयोग ने इस हत्याकांड की जांच शुरू की! मानवाधिकार आयोग को भेजी गई अपनी रपट में जिला पुलिस ने खुलासा किया कि सीसीटीवी की जांच में कोई बम या रिवाल्वर दिखाई नहीं दिया और सीसीटीवी को अजय बर्मन के साथ मारपीट करने से पहले बंद कर दिया गया था! पोस्टमॉर्टम की रपट भी पुलिस और मिलन आडेसरा की एफआईआर को झूठा साबित कर रही थी!

तत्कालीन थाना प्रभारी ने गायब करा दिया था ऑर्डर शीट

ज्ञातव्य है कि सकलदेव राम ने अभियुक्तों साथ सांठ-गांठ कर अदालत में 30.10.2010 को एफआरटी दायर किया और मामले को 22.02.2022 को खारिज करा दिया! इस दौरान अदालत से मृतक के परिवार वालों को कोई सम्मन नहीं मिला, ना ही सकलदेव राम या किसी अन्य पुलिस पदाधिकारी ने उन्हें उनका बयान लेने के लिए बुलाया! खोजबीन करने पर पता चला कि सकलदेव राम और अभियुक्तों ने मिलकर जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय से उक्त मामले का ऑर्डर शीट ही गायब करा दिया था!

पीयूसीएल के लोगों ने उसके बाद अपने दस्तावेजों और जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय से मिले गिने चुने आदेशों के माध्यम से उच्च न्यायालय में एफआरटी को एक रिट (WPCr 472/2017) दायर कर चुनौती दी! अदालत ने 13.04.2018 के अपने आदेश द्वारा एफआरटी को अवैध करार करते हुए पिटीशनर को कमप्लेन पिटीशन दायर करने को! इस पिटीशन को मजिस्ट्रेट श्री एकता सक्सेना ने 10.04.2024 को तकनीकि कारणों से खारिज कर दिया जिसे रिवीजन में सेशंस कोर्ट ने अवैध करार दिया और फिर लंबी अदालती प्रकिया के बाद अदालत ने अजय बर्मन की हत्या को हत्या करार दिया और मिलन आडेसरा और अन्य को हत्या के अपराध का जिम्मेदार बताया!

मृतक परिवार की ओर से इन्होंने की केस की पैरवी

इस मामले की पैरवी अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, अमिताभ कुमार, मंजरी सिंहा और निर्मल घोष ने की! ज्ञातव्य हो कि अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और अधिवक्ता अमिताभ कुमार इस मामले को पिछले 19 वर्षों से देख रहे थे और दोनों अधिवक्ताओं ने अदालत द्वारा 19 सालों के बाद दिए गए इस आदेश पर संतोष व्यक्त किया और अदालत की सराहना की!

Read Also: Jamshedpur SBI Agent Arrested: फ्रीज बैंक अकाउंट खोलने के लिए 40 हजार रुपये रिश्वत लेते SBI एजेंट को CBI ने रंगे हाथ दबोचा

Related Articles

Leave a Comment