
रांची : झारखंड में माध्यमिक शिक्षक (आचार्य) बहाली प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जवाब मांगा है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह पूरी जानकारी के साथ अगली सुनवाई में कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 जून को होगी।
यह पूरा विवाद माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या-02/2025) से जुड़ा है। परीक्षा देने वाले कई उम्मीदवारों का आरोप है कि परीक्षा खत्म होने के बाद जब उन्होंने JSSC की वेबसाइट पर लॉगिन करने की कोशिश की, तो वे अपनी आंसर-की (उत्तर कुंजी) और रिस्पॉन्स शीट नहीं देख पाए। वेबसाइट पर लगातार ‘यूजर डज नॉट एग्जिस्ट’ (User does not exist) का एरर मैसेज आ रहा था।
उम्मीदवारों को क्या है परेशानी
कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील दी गई कि आयोग की इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण सैकड़ों छात्र अपनी आंसर-की देखने से वंचित रह गए। नियम के मुताबिक, अगर किसी सवाल या जवाब पर कोई आपत्ति होती है, तो छात्र उस पर चैलेंज दर्ज करा सकते हैं। लेकिन रिस्पॉन्स शीट न खुलने के कारण छात्र समय पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने के कानूनी अधिकार से वंचित रह गए।
छात्रों का यह भी आरोप है कि इस तकनीकी खराबी का सीधा असर उनके रिजल्ट पर पड़ा है। उन्हें इसके बाद होने वाले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (दस्तावेज जांच) के लिए भी नहीं बुलाया गया, जिससे वे सीधे तौर पर इस भर्ती रेस से बाहर हो गए। छात्रों का कहना है कि अगर उन्हें समय पर आंसर-की देखने और आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलता, तो शायद आज वे पास होते।
हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले को बेहद गंभीर माना है। अदालत ने JSSC से सीधा सवाल किया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को आंसर-की और रिस्पॉन्स शीट क्यों नहीं दिखाई दी। इसके पीछे क्या तकनीकी कारण थे और जिन छात्रों का नुकसान हुआ है, उनके हक के लिए आयोग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
Read Also: Koderma News: खराब रिजल्ट पर सख्त कार्रवाई, सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के शिक्षकों का तबादला

