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JAC का बड़ा फैसला; अब फेल और परीक्षा छूटने वाले छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका

पहली बार विशेष परीक्षा का आयोजन, छूटे हुए छात्रों को भी मौका।इंप्रूवमेंट परीक्षा में पसंद के विषय चुन सकेंगे विद्यार्थी।

by Kanchan Kumar
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रांची: यदि आप जैक बोर्ड के परीक्षार्थी हैं और 10वीं या 12वीं में फेल हो गए हैं या फिर किसी कारणवश परीक्षा छूट गई है तो आपके लिए अच्छी खबर है। झारखंड में पहली बार मैट्रिक-इंटर की विशेष परीक्षा का आयोजन होने जा रहा है। जैक बोर्ड ने इंप्रूवमेंट और स्पेशल एग्जाम के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। इंप्रूवमेंट परीक्षा में विद्यार्थी पसंद के विषय चुन सकेंगे।

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) राज्य में पहली बार मैट्रिक और इंटरमीडिएट की विशेष परीक्षा आयोजित करने जा रहा है। इसके साथ ही वर्ष 2026 की इंप्रूवमेंट (समुन्नत), कंपार्टमेंटल (संपूरक) और विशेष परीक्षा को लेकर परिषद ने सोमवार को दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।

यहां करें आवेदन

जैक की ओर से जारी सूचना के अनुसार, वर्ष 2026 की मैट्रिक और इंटर परीक्षा में उत्तीर्ण, अनुत्तीर्ण और आवेदन जमा करने से वंचित रह गए विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। इच्छुक छात्र-छात्राएं डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट जैक डॉट झारखंड डॉट जीओवी डॉट आईएन के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन पूर्व में जारी यूजर आईडी और पासवर्ड के जरिए जमा होगा।

एक और राहत की बात यह है कि इंप्रूवमेंट परीक्षा के लिए विषयों की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है। विद्यार्थी चाहें तो सभी विषयों की या केवल उन विषयों की परीक्षा दे सकते हैं जिनके प्राप्तांकों से वे संतुष्ट नहीं हैं।

वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान राष्ट्रीय स्तर की स्कूली खेल प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही थीं। जानकारी के अनुसार, अंडर-17 और अंडर-19 राष्ट्रीय फुटबॉल और हॉकी टीमों के लिए चयनित कुछ विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे।

पहली बार होने जा रही विशेष परीक्षा

इसे देखते हुए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जैक को ऐसे छात्रों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था। विभागीय निर्देश के बाद पहली बार इस प्रकार की विशेष परीक्षा कराई जा रही है।

आंकड़ों पर गौर करें तो, वर्ष 2026 की मैट्रिक परीक्षा में करीब 20 हजार विद्यार्थी असफल हुए थे, जबकि लगभग 1800 छात्र आवेदन करने के बावजूद परीक्षा नहीं दे सके थे। वहीं, इंटरमीडिएट परीक्षा में करीब 26 हजार विद्यार्थी असफल हुए, जिनमें विज्ञान संकाय के लगभग 15 हजार परीक्षार्थी शामिल हैं।

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