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Chaibasa News : सेल की चिड़िया-दुबिल माइंस में उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई ठप

Chaibasa News : चिड़िया खदान के उप महाप्रबंधक (DGM) एसएस राव और रतन पात्री की आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों बातचीत भी बेनतीजा रही।

by Rajeshwar Pandey
SAIL Chidiya and Dubil Mines Halt Iron Ore Production and Transport
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चाईबासा : भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL) की मनोहरपुर ओर माइंस (चिड़िया-दुबिल माइंस) के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का जनआंदोलन शुक्रवार को आठवें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। लगातार हो रही बारिश और विपरीत परिस्थितियों के बाद भी बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगल में डटे हुए हैं। इस गतिरोध के कारण खदान में खनन कार्य (उत्पादन) और लौह अयस्क की ढुलाई लगातार आठवें दिन भी पूरी तरह ठप रही, जिससे सेल प्रबंधन की वित्तीय और प्रशासनिक चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

बेनतीजा रही प्रबंधन और ग्रामीणों की वार्ता

मामले को सुलझाने के लिए शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे चिड़िया खदान के उप महाप्रबंधक (DGM) एसएस राव और रतन पात्री आंदोलन स्थल पर पहुंचे। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार यह बातचीत भी बेनतीजा रही। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने चर्चा को केवल पेयजल संकट तक ही सीमित रखने की कोशिश की, जबकि स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने और माइंस की लाल मिट्टी व मुरूम के कारण बंजर हुई रैयती जमीन के उचित मुआवजे जैसी मुख्य मांगों पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया।इससे पहले 29 जून को भी सहायक महाप्रबंधक रवि रंजन, अन्य अधिकारियों और ठेका कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच कई घंटों तक वार्ता हुई थी, लेकिन वह भी बेनतीजा रही थी। तब प्रबंधन ने स्पष्ट किया था कि फिलहाल रोजगार देना संभव नहीं है और साल 2022 से अब तक किसी को नई नौकरी नहीं दी गई है। साथ ही, प्रबंधन ने हैंड माइनिंग की किसी भी योजना से इनकार करते हुए केवल सीएसआर (CSR) के तहत पानी की समस्या हल करने का आश्वासन दिया था।

हक मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष

आंदोलनकारी ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक नौकरी की नहीं, बल्कि उनकी जमीन, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है। वर्षों से उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन मिले हैं, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें उनका अधिकार नहीं मिल जाता, आंदोलन खत्म नहीं होगा।

इस आंदोलन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर देखी जा रही है। तेज बारिश के बीच प्लास्टिक के तंबुओं में शरण लेकर, जंगल में ही चूल्हा जलाकर खाना बनाते हुए और खुले आसमान के नीचे रात गुजारकर भी ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

ग्रामसभा की चार सूत्री मांगें

स्थानीय ग्रामसभा ने प्रबंधन के सामने अपनी चार सूत्री मांगें प्रमुखता से रखी हैं।

प्राथमिकता के आधार पर रोजगार

दुबिल गांव के 200 बेरोजगार युवाओं को खतियान (जमीन के रिकॉर्ड) के आधार पर प्राथमिकता देते हुए रोजगार दिया जाए।

उचित मुआवजा और नौकरी

माइंस के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा मिले और प्रभावित परिवारों के सदस्यों को नौकरी दी जाए।

अवैध पिलर हटाना

ग्रामीणों के धार्मिक स्थल (सरना स्थल), कब्रिस्तान और निजी रैयती जमीन पर प्रबंधन द्वारा लगाए गए अवैध पिलरों को तुरंत हटाया जाए।

पेयजल की व्यवस्था

गांव में गहराते जल संकट को दूर करने के लिए तुरंत चार नए चापाकल और आठ जलमीनारें स्थापित की जाएं।

बढ़ता आर्थिक और प्रशासनिक दबाव

लगातार आठ दिनों से उत्पादन बंद रहने के कारण सेल (SAIL) प्रबंधन पर भारी आर्थिक दबाव बन रहा है। दूसरी ओर, आंदोलन को मिल रहे लगातार जनसमर्थन के कारण स्थानीय प्रशासन के लिए भी कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। फिलहाल दुबिल माइंस क्षेत्र में गतिरोध और ग्रामीणों का संघर्ष जारी है, और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सेल प्रबंधन इस संकट को टालने के लिए अगला क्या कदम उठाता है।

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