
Jamshedpur : भारतीय उद्योग जगत के महानायक और टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन जहांगीर रतनजी दादाभाई (जेआरडी) टाटा को देश केवल एक सफल उद्योगपति, विमानन क्षेत्र के अग्रदूत और आधुनिक भारतीय उद्योग के शिल्पकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसे संवेदनशील इंसान के रूप में भी याद करता है, जिन्होंने अपने व्यवहार, विनम्रता और मानवीय मूल्यों से लाखों लोगों का दिल जीता।
टाटा स्टील ने जेआरडी टाटा की जयंती पर जारी संदेश में उनके जीवन, नेतृत्व और मानवीय मूल्यों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पद और अधिकार से पहले इंसानियत को महत्व दिया। वे मानते थे कि हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है और सच्चा नेतृत्व आदेश देने से नहीं, बल्कि अपने आचरण से प्रेरणा देने से स्थापित होता है।
सादगी और संवेदनशीलता थी उनकी सबसे बड़ी पहचान
टाटा स्टील के अनुसार, मुंबई स्थित स्टील हाउस के निवासी आज भी उन दिनों को याद करते हैं, जब जेआरडी टाटा स्वयं कार चलाकर किसी कर्मचारी या परिचित को घर छोड़ने चले जाते थे। कई बार वे परिवार के साथ चाय पीते और बच्चों के साथ खेलते भी थे। उस समय वे देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक के चेयरमैन कम और परिवार के सदस्य अधिक दिखाई देते थे।
सम्मान पद से नहीं, चरित्र से मिलता है
बॉम्बे हाउस की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया गया कि एक बार लिफ्ट ऑपरेटर ने नियमों के अनुसार किसी को भी कतार तोड़कर लिफ्ट में प्रवेश नहीं करने दिया, जिसमें जेआरडी टाटा भी शामिल थे। बाद में जब उस कर्मचारी का तबादला कर दिया गया तो जेआरडी टाटा ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नियमों का पालन करने वाले कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता। उनका मानना था कि सम्मान पद से नहीं, बल्कि चरित्र और ईमानदारी से अर्जित किया जाता है।
कर्मचारियों को माना संगठन की सबसे बड़ी ताकत
1938 से 1984 तक टाटा स्टील के चेयरमैन रहते हुए जेआरडी टाटा ने तकनीकी आधुनिकीकरण के साथ-साथ कर्मचारियों के कल्याण, प्रगतिशील मानव संसाधन नीतियों और प्रबंधन-कर्मचारी संवाद को नई दिशा दी। उन्होंने संयुक्त परामर्श व्यवस्था को बढ़ावा दिया, जो आज भी टाटा स्टील की ‘पीपुल फर्स्ट’ संस्कृति की मजबूत नींव मानी जाती है।
जमशेदपुर को बनाया आदर्श औद्योगिक नगर
जेआरडी टाटा का विश्वास था कि किसी भी उद्योग की सफलता उसके लोगों की समृद्धि पर निर्भर करती है। उन्होंने कर्मचारी कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सामाजिक विकास को व्यवसाय का अभिन्न हिस्सा बनाया। उनके प्रयासों से जमशेदपुर एक आदर्श औद्योगिक नगर के रूप में विकसित हुआ। नैतिक नेतृत्व पर उनका जोर आज भी टाटा स्टील के ‘एथिक्स मंथ’ जैसे अभियानों को प्रेरित करता है।
आज भी जीवंत है जेआरडी टाटा की विरासत
टाटा स्टील ने कहा कि जेआरडी टाटा के निधन के तीन दशक से अधिक समय बाद भी उनके विचार कंपनी के हर निर्णय में दिखाई देते हैं। कर्मचारियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य, टिकाऊ विनिर्माण, वर्ष 2045 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य, स्वच्छ तकनीकों में निवेश और जिम्मेदार कारोबारी संस्कृति उनके आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।
कंपनी ने कहा कि जेआरडी टाटा की सबसे बड़ी सीख यही थी कि विकास तभी सार्थक है, जब उससे लोगों का जीवन बेहतर बने।इसी सोच के साथ टाटा स्टील आज भी जमशेदजी टाटा और जेआरडी टाटा के आदर्शों पर चलते हुए समाज और राष्ट्र निर्माण के अपने संकल्प को आगे बढ़ा रही है।

