
रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को राजस्व वसूली के लक्ष्य को हर हाल में हासिल करने का निर्देश लिया है। सीएम ने स्पष्ट कहा है कि राजस्व वसूली में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने हाल में परिवहन विभाग की समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को राजस्व वसूली के लिए लक्ष्य तय कर काम करने को कहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 2700 करोड़ रुपये के लक्ष्य को हर हाल में हासिल करने का निर्देश दिया। सीएम ने राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए प्रवर्तन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने को कहा है तथा राजस्व रिसाव रोकने के लिए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग तय लक्ष्य के अनुरूप कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध तरीके से राजस्व संग्रह बढ़ाए।
पिछले वित्तीय वर्ष 92% लक्ष्य हासिल हुआ था
मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2400 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 2217 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जो निर्धारित लक्ष्य का 92 प्रतिशत है। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले मई 2026 तक 389 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया जा चुका है।
अन्य राज्यों से कम वसूली हुई, प्रवर्तन तंत्र को किया जाएगा मजबूत
समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तुलना में झारखंड में प्रवर्तन के माध्यम से होने वाला राजस्व अपेक्षाकृत कम है। इस पर मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन तंत्र को और मजबूत करने, नियमित जांच अभियान चलाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि विभाग के राजस्व में वृद्धि हो सके।
नियमित समीक्षा करने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राजस्व संग्रह की नियमित समीक्षा की जाए और लक्ष्य प्राप्ति में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। उन्होंने विभाग को संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए चालू वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत राजस्व लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने को कहा।
चेकिंग, टैक्स और जुर्माने से भरता है परिवहन विभाग का खजाना
परिवहन विभाग का राजस्व केवल वाहन कर तक सीमित नहीं है। विभाग को रोड टैक्स, वाहन निबंधन, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य सेवाओं से नियमित आय होती है। वहीं, प्रवर्तन अभियान के दौरान ओवरलोडिंग, बिना परमिट परिचालन, टैक्स चोरी, बिना फिटनेस या बीमा वाले वाहनों पर कार्रवाई और मोटर वाहन अधिनियम के तहत लगाए जाने वाले जुर्माने भी राजस्व का बड़ा स्रोत हैं। राज्य के विभिन्न चेक पोस्ट और प्रमुख मार्गों पर नियमित जांच अभियान चलाकर कर चोरी रोकने तथा राजस्व रिसाव पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए प्रवर्तन व्यवस्था को और सशक्त करने पर जोर दिया है।

