
रांची: अब झारखंड के पंचायत सहायकों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ के आह्वान पर 5 अगस्त को प्रदेश भर से जुटे पंचायत प्रतिनिधि रांची के मोरहाबादी मैदान में जमा हो रहे हैं, जहं से वे जुलूस निकालकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार के अनुसार, बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब शासन स्तर पर कोई सकारात्मक सुनवाई नहीं हुई, तब जाकर कर्मचारियों को सड़कों पर उतरने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने चेताया कि अगर इस घेराव प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने उनकी वाजिब मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरे राज्य में कामकाज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
जानिए उनकी क्या हैं मांगें
पंचायत सहायकों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 8 प्रमुख बिंदु रखे हैं:
मानदेय और सेवा शर्तें: वर्तमान 2,500 रुपये के मामूली मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए और हर साल ग्राम सभा से अनिवार्य अनुमोदन की शर्त हटाई जाए।
सीधी बातचीत और पदोन्नति: मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद की व्यवस्था हो तथा पंचायत सचिव भर्ती में पंचायत सहायकों को 70% आरक्षण दिया जाए।
सामाजिक सुरक्षा: कार्यरत पंचायत सहायक की असमय मृत्यु होने पर आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए, साथ ही सभी कर्मियों को स्वास्थ्य व दुर्घटना बीमा का सुरक्षा कवच मिले।
मॉनिटरिंग सेल का गठन: पंचायत स्तर के कर्मियों की समस्याओं के त्वरित और समयबद्ध निपटारे के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष निगरानी समिति (मॉनिटरिंग सेल) बनाई जाए।
ग्रामीण व्यवस्था की धुरी कहे जाने वाले इन पंचायत सहायकों का कहना है कि वे सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में दिन-रात एक करते हैं, इसलिए उन्हें सेवा सुरक्षा और उचित हक मिलना ही चाहिए। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आंदोलन के बाद प्रशासन का क्या रुख रहता है।
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