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Chaibasa News : एसडीएम के आदेश के बाद भी दुकान पर कब्जा बरकरार, विधवा महिला ने न्याय के लिए लगाई गुहार

स्वतंत्रता सेनानी परिवार की बहू बताने वाली मीना देवी ने प्रशासन से न्याय की मांग की है।

by Rajeshwar Pandey
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चाईबासा : रांची जिले के बुंडू में एक विधवा महिला को एसडीएम के आदेश के बावजूद अपनी दुकान का कब्जा नहीं मिलने का मामला सामने आया है। खुद को स्वतंत्रता सेनानी परिवार की बहू बताने वाली मीना देवी ने प्रशासन से न्याय की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

मीना देवी का कहना है कि उनके पति स्व. प्रेम कुमार भगत के निधन के बाद बुंडू मेन रोड स्थित दुकान को किरायेदार खाली नहीं कर रहा। आरोप है कि दुकान मांगने पर उन्हें और परिवार की महिलाओं को सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया। साथ ही प्रभावशाली लोगों का नाम लेकर धमकाया भी गया।

एसडीएम का आदेश और आगे की कार्रवाई

पीड़िता के अनुसार दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 11 मई 2026 को बुंडू एसडीएम ने किरायेदार की बेदखली का आदेश दिया था। आदेश में कहा गया था कि तय समय में दुकान खाली न होने पर अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी की मदद से कब्जा दिलाया जाए। मीना देवी ने बताया कि 15 जून को सीओ और थाना प्रभारी को आवेदन दिया और 1 जुलाई को रांची ग्रामीण एसपी के जनता दरबार में भी शिकायत की। अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।

पीड़िता के सवाल

“जब एसडीएम का आदेश है और उस पर कोई रोक नहीं है तो प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या किसी बड़े लोगों के नाम की वजह से आदेश नहीं माना जा रहा?” मीना देवी ने यह सवाल उठाया। उनका कहना है कि महीनों बीत गए लेकिन किरायेदार का कब्जा आज भी बना हुआ है, जिससे उन्हें आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सीएम और प्रशासन से मांग

मीना देवी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जिला प्रशासन और पुलिस से मामले में दखल देने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ कानूनी रूप से अपनी संपत्ति का कब्जा चाहिए।

प्रशासन और दूसरे पक्ष का पक्ष

यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। यदि पीड़िता के आरोप सही हैं तो यह एसडीएम के आदेश के अनुपालन से जुड़ा गंभीर मामला है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रशासन, पुलिस या किरायेदार पक्ष की तरफ से आधिकारिक बयान नहीं मिला है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

कानून के सम्मान पर सवाल

यह विवाद सिर्फ दुकान का नहीं है, बल्कि न्यायालय के आदेशों के पालन और कानून के शासन से जुड़ा है। अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन कब तक पीड़िता को एसडीएम के आदेश के अनुसार राहत दिलाता है।

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