
रांची : हिंदू जनजागृति समिति पिछले दो दशकों से लव जिहाद जैसे गंभीर विषयों पर समाज में जागृति लाने के साथ-साथ प्रमाण सहित शासन-प्रशासन का भी ध्यान आकर्षित करती रही है। इतिहास साक्षी है कि महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह जी तथा आधुनिक काल में स्वामी विवेकानंद और डॉ. हेडगेवार ने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए संगठन, त्याग और राष्ट्राभिमान का संदेश दिया। आज उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए सनातन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा हेतु युवाओं सहित समस्त समाज का संगठित होना समय की आवश्यकता है। – *ऐसे प्रेरणादायी विचार, विश्व हिंदू परिषद के झारखंड प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने रांची में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह में व्यक्त किया।
‘‘आज देश और धर्म पर होने वाले आघात केवल सीमा तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि वे सीधे हमारी चौखट तक आ पहुंचे हैं। आतंकवाद और घुसपैठ के साथ-साथ ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘वक्फ बोर्ड का अतिक्रमण’ और हाल ही में उजागर हुए ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसे विविध आघातों एवं षड्यंत्रों के माध्यम से हिंदुओं को योजनाबद्ध तरीके से लक्ष्य किया जा रहा है। इसके माध्यम से देश का भू-राजनीतिक मानचित्र और जनसंख्या वृद्धि का गणित बदलने का भयंकर षड्यंत्र रचा जा रहा है। जब तक हिंदू समाज अपना ‘स्वबोध’ (सामर्थ्य और धर्मज्ञान) और ‘शत्रुबोध’ (शत्रु की छिपी रणनीति) जागृत नहीं करता, तब तक इन चौतरफा आघातों का प्रतिकार करना संभव नहीं है। इसलिए हिंदुओं को अब केवल मूकदर्शक न बनकर देश-धर्म रक्षण के लिए कृतीशील होना चाहिए,’’ ऐसे स्पष्ट और प्रखर विचार हिंदू जनजागृति समिति के पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत राज्य समन्वयक, शंभू गवारे ने व्यक्त किया। हिंदू जनजागृति समिति की ओर से 29 जुलाई को देशभर में 64 स्थानों पर ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ का आयोजन किया गया।
आगामी विश्वयुद्ध और आपातकाल की आशंका को देखते हुए, समिति की ओर से हिंदुओं से प्राथमिक उपचार, अग्निशमन और स्व-रक्षा प्रशिक्षण लेने का आवाह्न किया गया।
इस महोत्सव में समिति के प्रेरणास्थान सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले के संदेश का वाचन, रामराज्य की स्थापना के लिए संकल्प और नामजप, धर्मरक्षकों एवं हिंदुनिष्ठों का सत्कार, राष्ट्रभक्त और धर्मनिष्ठ मान्यवरों का मार्गदर्शन, स्व-रक्षा की आसान पद्धतियों का प्रात्यक्षिक (डेमो), तथा ‘समिति’ के प्रेरणास्थान सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले जी के कार्य पर आधारित लघुचित्रपट (डॉक्यूमेंट्री) दिखाया गया। इस महोत्सव में विविध विषयों पर ग्रंथ-प्रदर्शनी तथा राष्ट्र-धर्म विषयक फलक-प्रदर्शनी (फ्लेक्स बोर्ड) भी लगाई गई थी। अनेक लोगों ने इसका लाभ लिया।
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